“बेटियां” सेवा हैं ,समर्पण हैं, उल्फत हैं बेटियां। मां- बाप पे भगवान की रहमत हैं बेटियां। बटवारे की इबादत बेटों ने जब लिखी। मां बाप के घावों पर मरहम हैं बेटियां। ज़ालिम सी ज़िन्दगी जब भी सताने लगी। कामों की व्यस्तता में फुरसत हैं बेटियां। ग़रीबी में भी राजा, जो […]

एमटीटी। कविता।  मां हमारी चांद, और हम उसके तारे थे। वो बचपन के दिन भी , तमन्नाओं के पिटारे थे। कभी हवा के जहाजों में तैरने का सपना। कभी टाफियों की बरसात की उम्मीद पनपना। कुल्फी और फुल्की, हमारे शाही भोजन थे। एक छोटा सा राज्य हमारा,और हम उसके राजन […]