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New Sustainable biopolymer technology plastics

My Times Today.Researchers have developed a new sustainable biopolymer technology to make bioplastic polymers which may one day free the world of its worst pollutant, finds a new study. The process to make the bioplastic polymers does not require land or fresh water, which are scarce in most parts of the world, and is friendly both to the environment and residents. The study showed that the new process produces the bioplastic polymer known as polyhydroxyalkanoate  from marine microorganisms that feed on seaweed and recycle into organic waste.In addition, it is biodegradable and produces zero toxic waste, as per the study published in the journal Bioresource Technology. “Plastics take hundreds of years to decay. So bottles, packaging and bags create plastic ‘continents’ in the oceans, endanger animals and pollute the environment,” said Alexander Golberg, researcher from the Tel Aviv University in Israel. “Plastic is also produced from petroleum products, which has an industrial process that releases chemical contaminants as a -product,” said Golberg.A partial solution to the plastic epidemic is bioplastics, which do not use petroleum and degrade quickly, according to the researchers. There are already factories that produce this type of bioplastic in commercial quantities. However, they use plants that require agricultural land and fresh water, said the team. “The process we propose will enable countries with a shortage of fresh water, such as Israel, China and India, to switch from petroleum-derived plastics to biodegradable plastics,” Golberg said.

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आईए यरूशलम को जानें, क्यों हो रही है इसकी चर्चा

माय टाइम्स टुडे। राजधानी वह शहर होता है जहां से किसी देश या राज्य पर शासन किया जाता है। प्राचीन काल से राजधानी बनाने की परम्परा रही है क्योंकि एक स्थित राज्य या देश के लिए बहुत जरुरी है। राजधानी ही वह शहर होता है जहां से देश या राज्य के विषय में राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक ,कूटनीतिक और सांस्कृतिक आदि नीतियों का प्रतिपादन किया जाता है। पुरातन समय में यह राजा , महाराजाओं और सामंतों आदि का निवास हुआ करता था और आज वर्तमान समय के राजनेताओं का निवास स्थल है। इतिहास पर नजर ड़ाले तो ज्ञात होता है कि विदेशी आक्रमणकर्ताओं का मुख्य निशाना राजधानी हुआ करती थी क्योंकि यही किसी देश या राज्य का सबसे प्रमुख शहर होता था और आज भी है।

राजधानी को एक बार स्थापित करने के बाद बदलना कोई आम बात नहीं है। यह तो आज से 2000 साल से भी पहले से होता आया है। मगध की बात करें तो हर्यक वंश के समय कभी राजधानी राजगृह तो कभी पाटलीपुत्र(पटना) हुआ करती थी। ऐसे इतिहास में कई उदाहरण है जब राजधानी को बदला गया। वर्द्धन वंश या पुष्यभूति वंश के राजा हर्षवर्द्धन ने अपनी राजधानी थानेश्वर से कन्नौज में स्थापित की। हर्षवर्द्धन के बाद के साल में यह परम्परा चलती रही तुगलक वंश का एक पागल शासक जिसने अपनी राजधानी को दिल्ली से देवगिरि(तुगलकाबाद) स्थानान्तरित करने की निर्णय लिया। उसकी इसी सनक के कारण उसी मासूम प्रजा अकारण ही काल के गाल में समा गई। मुगलकाल में आगरा से फतेहपुर सीकरी, फतेहपुर सीकरी से लाहौर, लाहौर से आगरा और अंतत: राजधानी दिल्ली(शाहजहांनाबाद) को घोषित कर दिया। मराठाओं के साल में राजधानी के दो ठिकाने थे जिनमें एक कोल्हापुर और दूसरा पुणे(पूना) था।

राष्ट्रकूट साम्राज्य के समय राजधानियां बदलती रही कभी मान्यखेट तो कभी  कल्याणी। राजधानी बदलने का सिलसिला आज तक चलता आ रहा है। विश्व के कई देशों ने अपनी राजधानी बदली। किसी देश ने रणनीतिक तौर पर तो किसी ने सामाजिक उद्धार तो किसी ने राजनीतिक कारणों से तो किसी ने आर्थिक कारणों से। म्यानमार ने अपनी राजधानी यांगून(रंगून)से नायपेटॉ करदी तो नाइजीरिया ने लागोस से अबुजा वही पाकिस्तान ने भी राजधानी कराची से इस्लामाबाद स्थानान्तरित कर दी। जहां ब्राजील ने अपनी राजधानी रियो डि जेनिरो से ब्रासिलिया स्थानान्तरित कर दी वही श्रीलंका ने कोलंबों से जयवर्द्धनपुरे कोट कर दी। दक्षिणअफ्रीका की तो तीन-तीन राजधानियां है केपटाउन, जोहेनिसबर्ग और प्रिटोरिया।

तात्कालीन भारत की बात करें तो ब्रिटिश काल में भारत की राजधानी कोलकाता को बनाया गया था। कोलकाता को राजधानी बनाने के पीछे कई कारण थे जिनमें एक तो यह था कि उस समय यह देश के मध्य में स्थित था तथा दूसरा यह कि समुद्र के किनारे स्थित था। लेकिन 1911 में अंग्रेजों ने ब्रिटिश भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानान्तरित कर दी। दिल्ली को राजधानी बनाने के पीछे कई कारण थे। एक कारण यह था कि 1911 तक अफगानिस्तान और म्यानमार भारत से अलग हो चुके थे और भारत उपमहाद्वीप में अब वर्तमान पाकिस्तान, बंग्लादेश और भारत थे। देश के मध्य के किसी शहर को राजधानी चुनना था तो वह थी दिल्ली। दूसरा कारण यह कि दिल्ली एक प्राचीन शहर है जिसके अस्तित्व महाभारत काल से है। तीसरा कारण यह कि वायसराय का निवास दिल्ली में बनने के कारण दिल्ली को राजधानी बनाया गया। ब्रिटिश भारत की दो राजधानियां थी। ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला और शीतकालीन कोलकाता थी।

कभी-कभी राजधानी बदलना इतना आसान भी नहीं होता है क्योंकि कई कारण होते जो स्थिति को असामान्य बना देते है। इसी का एक उदाहरण है “यरुशलम”। यरुशलम तब और ज्यादा चर्चा जब डोनाल्ड ट्रम्प ने यह घोषणा की कि अमेरिका अपना दूतावास इजरायल की वर्तमान राजधानी तेल अवीव से यरुशलम स्थानान्तरित करेगा और यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में स्वीकार करता है। यरुशलम स्थापना के बाद से ही विवादों में रहा है।

यरुशलम के विवादित होने के दो कारण है जिसमें एक राजनीतिक और दूसरा धार्मिक है। यरुशलम को शेलम का शहर अर्थात् शांति का शहर कहा जाता है। इस शहर की स्थापना शांति के लिए की गई थी। यरुशलम तीन धर्मों से संबंधित है इसाई , मुस्लिम और यहूदी । मुख्यतः कहा जाए तो यह शहर यहूदी से संबंधित है बाद में इसाई और सबसे आखिरी में मुस्लिम धर्म से संबंध होने के प्रमाण मिलते हैं। यरुशलम को पाने के लिए कई युद्ध हुए जिनमें क्रूसेड का युद्ध और सिक्स डे युद्ध बहुत ही महत्वपूर्ण है। सिक्स डे युद्ध दो तरफा हुआ था जिसमें एक तरफ गोलन की पहाड़ियो पर सीरिया और सिनाई के पठार पर मिस्त्र के साथ हुआ। इजरायल युद्ध में विजयी रहा। इन्हीं युद्धों के बीच मुस्लिम बहुल फलीस्तीन को इजरायल ने अपने कब्जे में ले लिया और यरुशलम को अपनी राजधानी घोषित कर दिया।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इजरायल के इस फैसले पर निंदा जाहिर की जिसके कारण आज तक किसी भी देश ने यरुशलम में अपना दूतावास स्थापित नहीं किया। यरुशलम को दो भागों में बांटा गया हैं पूर्वी यरुशलम और पश्चिमी यरुशलम। पूर्वी यरुशलम फलीस्तीन और पश्चिमी यरुशलम इजरायल में स्थित है। इजरायल एक ताकतवर देश है जो सूचना प्रौधोगिकी और तकनीक में अग्रणी है। इजरायल के पास दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सेना है जो वह अपना रक्षा के लिए उपयोग करता है। यरुशलम एक विवादित शहर परंतु इसे और विवादित बना दिया अमेरिका ने। अमेरिका के इस कदम को उठाने की चेष्ठा न तो बिल क्लिंटन ने की नाही बराक ओबामा ने। यरुशलम की आग यूरोप और अरब जगत तक फैल चुकी है।

यरुशलम एक विश्व विरासत स्थल है। यह जिसके पास भी रहे सुरक्षित रहे और शांति रहे। यह मेरी कामना है।

                            “जय हिंद”

विनय कुशवाहा