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सुंजवान आर्मी कैंप हमला : सेना ने मार गिराये तीन आतंकी सर्च ऑपरेशन जारी

सुंजवान आर्मी कैंप में ऑपरेशन अभी जारी है.बता दें कि शनिवार को कुछ आतंकियों ने सेना कैंप पर हमला बोल दिया था. इस फिदायीन हमले में आर्मी के दो जवान शहीद हो गए. देर शाम तक सेना के ऑपरेशन में 3 आतंकियों को मार गिराया गया. सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी की हुई है तथा सर्च ऑपरेशन चल रहा है. इलाके में अभी और आतंकी छिपे होने की आशंका है. मारे गए आतंकवादियों के पास से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया है.

बता दें कि इस घटना के बाद देशभर में हाई अलर्ट घोषित किया गया है. साथ ही गृह मंत्री ने कहा है कि वह इस घटना पर लगातार नजर बनाए हुए है. माना जा रहा है कि आंतकी संगठन ने रोहिंग्यां का इस्तेमाल किया है.

इससे पहले कल जम्मू विधानसभा में इस हमले को लेकर हंगामा हो गया था. जहां एक तरफ बीजेपी के नेता पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे वही एनसी के नेता अकबर लोन पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे.

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‘ मेरी रगों में मेरी सेना है ‘ मेरा संदेश मेरे सैनिकों के नाम

माय टाइम्स टुडे, इंद्रभूषण मिश्र।हमारे सेना के जवान अपनी तमाम खुशियां, परिवार और अपने अपनों से दूर रह कर, धूप – छांव,  आंधी- तुफान की परवाह किए बिना दिन रात सीमा पर हमारी रक्षा के लिए मुस्तैद रहते है। हमारे सैनिकों की समर्पण और बलिदान के दम पर ही हम सभी अपने घरों में चैन की नींद सो पाते है। इसलिए हमारा भी दायित्व बनता है कि हम भी अपने जवानों के लिए कुछ करें। माय टाइम्स टुडे ने सेना के जवानों के लिए एक विशेष अभियान “मेरी रगों में मेरी सेना हैं” शुरू किया है, जिसमें हम अलग-अलग लोगों से अपनी सेना को समर्पित साक्षात्कार करते है और यह जानने की कोशिश करते हैं कि देश के दिल में सेना के लिए कितना सम्मान है। इस कड़ी में आज हमारे साथ हैं मदन मोहन जी, आप पटना न्यूटन ट्यूटोरियल्स में रसायन शास्र के प्रध्यापक है। आपसे फोन पर बात- चीत के प्रमुख अंश :

मेरे रगों में मेरी सेना हैं, इस अभियान के बारे में आप क्या कहेंगे? क्या इससे लोगों सेना के प्रति प्रेम व सम्मान की भावना जागृत होगी?
मदन मोहन जी – जी बिल्कुल ! लोगों के मन में सेना के प्रति शुरू से सम्मान व स्नेह की भावना रही है। लोग सेना के लिए, जवानों के लिए बहुत कुछ करना चाहते हैं परन्तु उन्हें सही मंच नही मिलता जिससे की वो अपनी बात को, अपनी भावनाओं को सेना तक पहुंचा सके। ऐसे में इस अभियान के माध्यम से लोग सैनिकों तक अपना संदेश पहुचाने मे सफल होंगे।
जब 15 अगस्त और 26 जनवरी आता है तो हम लोग फेसबुक, व्हाट्सप पर तिरंगे व सैनिको की तस्वीरें लगाते हैं, क्या इतना काफी है?
मदन मोहन जी- नही ! सैनिक हमारे लिए हर पल हर रोज अपना घर परिवार छोड़कर हमारी रक्षा के लिए अपनी जान को बंदुक की नोक पर रख कर पहरा करते हैं, मैं तो कहता हूं वो ड्यूटी नही वरन् तपस्या करते हैं, उनके इस कर्तब्य निष्ठा के लिए हम कुछ भी करें तो कम होगा ।
आप एक शिक्षक है, क्या हमारे पाठ्यक्रम में सैनिकों के पराक्रम की कहानियों को शामिल करना चाहिए?
मदन मोहन जी-  अवश्य हीं करना चाहिए, पहले भी कुछ परमवीर चक्र से सम्मानित जवानों की कहानीयां शामिल थी परन्तु अब ये वक्त आ गया है कि नियमित पाठ्यक्रम में अधिक से अधिक स्थान दिया जाए, जिससे युवाओं में राष्ट्र प्रेम की प्रबल भावना जागृत हो सके।
सेना के प्रति सरकार के काम से आप कितना संतुष्ट है ?
मदन मोहन जी – हमारी सरकार सेना को अच्छी सुविधा देती हैं पर मुझे लगता है इसे और बेहतर करने की जरुरत है ।
पिछले साल कुछ लोगों ने सेना विरोधी नारे लगाये, सेना को भला बुरा कहा, ऐसे लोगों की सोच पर आप क्या कहेंगे?
मदन मोहन जी–  ऐसे लोग बहुत हीं तुच्छ मानसिकता के होते है, अगर मीडिया इनको कवरेज देना बंद कर दे तो
यह स्वत: घूंट कर मर जाएंगे, इनकी औकात हीं क्या है…
आपका संस्थान सैनिकों के बच्चों के लिए किस प्रकार की सुविधा प्रदान करता है?
मदन मोहन जी– हमारा संस्थान सैनिकों के बच्चों के लिए पुरी तरह से समर्पित है, हम उन्हें फीस में विशेष छुट प्रदान करते हैं।साथ ही मदन जी ने वचन दिया कि अगर सैनिकों के बच्चें उनके संस्थान में आते है तो उनके लिए अलग से बैच बनाकर उनको विशेष सुविधा दी जाएगी।