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चित्र भारती फिल्म महोत्सव का भव्य समापन,कई हस्तियां रहीं मौजूद


दिल्ली के सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में आयोजित चित्र भारती फिल्म महोत्सव का भव्य समापन बुधवार को किया गया। तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव के समापन सत्र में सीबीएफसी के अध्यक्ष प्रसून जोशी, प्रख्यात फिल्म निर्देशक सुभाष घई, ख्याति प्राप्त फिल्म लेखक विजेंद्र प्रसाद सहित जानी मानी हस्तियां मौजूद रहीं।  इस मौके पर तीन दिनों तक दिखाई गयी फिल्मों में से चयनित बेस्ट फिल्मों को पुरस्कृत किया गया।

बता दें कि भारतीय चित्र साधना के तत्वावधान में आयोजित इस फिल्म समारोह में देश भर से सात सौ से अधिक प्रविष्टियां आई थी। जिसमें से 160 चयनित फिल्मों को तीन दिनों तक दिखाया गया। इस फिल्म समारोह में देशभर के युवा फिल्मकारों और छात्रों ने भाग लिया। इस दौरान फिल्म जगत की प्रख्यात हस्तियों जैसे फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर, सुभाष घई, भोजपुरी स्टार मनोज तिवारी, सुदीप्तो सेन आदि ने मास्टर क्लास के माध्यम से युवा फिल्मकारों को प्रशिक्षण भी दिए। इससे पहले उद्घाटन के मौके पर हेमा मालिनी, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर, मधुर भंडारकर, अर्जुन रामपाल, प्रियदर्शन, सुदीप्तो सेन आदि हस्तियां मौजूद रही।
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भारतीय चित्र साधना : दिल्ली में जुटेगा फिल्मी हस्तियों का जमावड़ा

http://mytimestoday.comभारतीय संस्कृति और परंपरा को ध्यान में रखते हुए भारतीय चित्र साधना ने रंगमंच, गीत, पेंटिंग, फिल्म, वृतचित्र आदि के माध्यम से भारतीयता के संदर्भ में युवाओं को जोड़ने की पहल की है। इसके लिए 19 से 24 फरवरी तक दिल्ली के सिरीफोर्ट आडिटोरियम में चित्र भारती फिल्म महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।भारतीय संस्कृति और मूल्यों पर आधारित इस फिल्म महोत्सव को दो श्रेणियों में बांटा गया है जिसमें पहला फिल्म संस्थान संवर्ग और दूसरा गैर फिल्म संस्थान संवर्ग शामिल है।

प्रविष्टियों का चयन : 

देश भर से इस महोत्सव के लिये कुल 750 प्रविष्टियां प्राप्त हुई थी। जिसमें पांच श्रेणियों लघु फिल्म, वृत्तचित्र, कैंपस फिल्म्स (प्रोफेशनल), कैम्पस (गैर-प्रोफेशनल) और एनिमेशन के अंतर्गत पहले चरण में 197 प्रविष्टियों का चयन किया गया था। जिसके बाद अंतिम चरण में कुल 160 प्रविष्टियों का चयन किया गया। इन प्रविष्टियों के चयन के लिए एक विशेष चयन समिति का गठन किया गया था। जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ फिल्मकार मधुर भंडारकर ने की। इसके अलावा समिति में सुभाष घई, प्रिय दर्शन, हेमा मालिनी, विक्टर बनर्जी, ज्वाय मुखर्जी, अर्जुन रामपाल, मनोज तिवारी, परेश रावल, बाबुल सुप्रियो आदि शामिल  रहे। चयनित प्रविष्टियों में हिंदी, मराठी, दक्षिण भारतीय भाषाओं, पूर्वोत्तर समेत पूरे देश से विभिन्न भाषाओं की फिल्में शामिल हैं।

ये हस्तियां हो रही हैं शामिल : 

हेमा मालिनी, मधुर भंडारकर, अर्जुन रामपाल, सुभाष घई, मनोज तिवारी, सुदीप्तो सेन, स्मृति ईरानी आदि।

भारतीय चित्र साधना एक नजर : 

फिल्में मनोरंजन के साथ- साथ जन संचार का सबसे लोकप्रिय और प्रभावी माध्यम होती हैं। फिल्में वैचारिक विमर्श के साथ – साथ सांस्कृतिक मूल्यों के आदान प्रदान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2015 में भारतीय चित्र साधना की स्थापना की गयी। लघु फिल्म, एनिमेशन, कार्टून, वृतचित्र आदि के माध्यम से भारतीय चित्र साधना युवाओं को भारतीय मूल्यों और सबसे पहले राष्ट्र की भावना से जोड़ने का सफल प्रयास कर रही है। इस वर्ष 19फरवरी से 21 फरवरी तक दिल्ली में तीन दिवसीय फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें देश के जाने माने कलाकार, फिल्मकार शामिल हो रहे हैं। इसके पहले इंदौर, भोपाल और जबलपुर में ऐसे आयोजन हो चुके हैं। इस संस्थान से देश के कई नामचीन कलाकार, संगीतकार और अभिनेता इस संस्थान से जुड़े हुए है जो नवोदित प्रतिभाओं को निखारने में अग्रणी भूमिका निभा रहे है।

भारतीय चित्र साधना के उद्देश्य :
जनता को फिल्मों के माध्यम से भारतीय मूल्यों और परंपराओं के बारे में अवगत कराना।
भारत के साथ – साथ वैश्विक स्तर पर मूल्य आधारित सिनेमा को बढ़ावा देना।
सिनेमा को समृद्ध बनाने के लिए प्रायोगिक और अनुसंधानिक कार्यों को बढ़ावा देना।
छात्रों को शैक्षणिक, पेशेवर और अन्य प्रकार के प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए संस्थानों में फिल्मों को बढ़ावा दिए जाने वाले पाठ्यक्रमों को शामिल करना।
लघु फिल्म, वृत्तचित्र, एनिमेशन, कार्टून और अन्य स्वस्थ मनोरंजन फिल्मों को बढ़ावा देना।
क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में भाग लेना।
मूल्य आधारित सिनेमा को बढ़ावा देने वाले व्यक्तियों और संस्थानों का सम्मान करना।

यह एक अच्छी पहल है। मैं इंदौर में इस महोत्सव के पहले संस्करण में उपस्थित था। उस आयोजन की सफलता के बाद दिल्ली में दूसरे संस्करण का आयोजन हो रहा है। जगह भी सही है … स्थल भी उपयुक्त है – हम केवल उम्मीद कर सकते हैं कि सीबीएफएफ का मंच वृहद हो जाए। आज भारतीय सिनेमा का दायरा विश्व स्तर पर सिकुड़ रहा है। वैश्विक संदर्भ में हम हर गुजरते दिन अप्रासंगिक हो रहे हैं। इस वास्तविकता की कड़ी में हम सभी भारतीय सिनेमा के भावी ध्वजवाहक के रूप में सीबीएफएफ को आगे देख रहे हैं। –सुदीप्तो सेन (सुप्रसिद्ध फिल्म निर्देशक)