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दरअसल कोशिश तो ताजपोशी की है चुनाव तो बहाना है


माय टाइम्स टुडे। इन दिनों कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी छाए हुए है. पहली बार ऐसा हो रहा है कि गुजरात में कांग्रेस कम राहुल गांधी ज्यादा दिखाई दे रहे है. हालांकि राहुल गांधी का इस तरह से गुजरात में दिखाई देना कितना फायदेमंद होगा यह तो वक्त ही तय करेगा.

अक्सर लंबी छुट्टियों पर विदेश घुमने वाले राहुल गांधी अचानक से राजनीति में सक्रिय हो गये है.कहा ये भी जा रहा है कि राहुल गांधी का अचानक से राजनीति में इस तरह सक्रिय होना किसी बड़े परिवर्तन की तरफ इशारा कर रहा है.

इसके पहले आपको याद होगा अमेरिका में राहुल गांधी अपने भाषणों की वजह से छाए हुए थे. उन्होंने ने मोदी पर जमकर शब्द बाण चलाएं थे. उसके बाद से राहुल गांधी लगातार मीडिया में बने हुए है.

मीडिया में बने रहना भी राहुल की नीति का एक हिस्सा है. और वो अपने तरह तरह के बयानों से इस बात की भरपूर कोशिश भी कर रहे है कि मुद्दा कांग्रेस बीजेपी होने की बजाए राहुल मोदी हो जाए. चुनाव प्रचार में अक्सर कांग्रेस को लीड करने वाली सोनिया गांधी भी इस बार कम ही दिखाई दे रही है.

नरेंद्र मोदी का मंदिरों में जाना भले पुरानी परंपरा रही हो मगर अब इसका क्रेज राहुल गांधी को भी हो गया है. वह हर उस मंदिर में जा रहे है जहां मोदी जाते है.

इस बार के गुजरात चुनाव में राहुल गांधी धुंआधार रैली कर रहे है.इस दौरान वह अपने तरकश का हर तीर मोदी के निशाने पर लगा रहे है. आपको याद होगा कुछ दिन पहले विकास पागल हो गया है का उनका डायलॉग सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा था.

नोट बंदी, जीएसटी जैसे तमाम बडे़ मुद्दों पर राहुल गांधी मोदी को घेरने का भरपूर प्रयास कर रहे है. गुजरात चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन जैसा भी हो लेकिन एक बात तो तय है कि राहुल गांधी का स्तर अब बढ़ गया है. विशेषज्ञ तो यह भी मान रहे है कि राहुल गांधी गुजरात चुनाव बाद कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए जा सकते है.

सोनिया ने स्वयं को थोड़ा किनारा कर राहुल गांधी को आगे आने का मौका दे दिया है. सोनिया गांधी जानती है कि राहुल के ताजपोशी में कुछ लोग विरोध करेंगे. इसलिए वह राहुल को आगे कर राज्याभिषेक की तैयारी में लग गयी है.

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राहुल गांधी को इतना कलेवर और कवरेज तो कभी मिला नहीं


MY TIMES TODAY. भारतीय नेता अक्सर अपने राजनीतिक वर्चस्व को बनाए रखने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाते रहते है. ये कोई नयी बात नहीं है. लेकिन अब ये नेता देश छोड़ अपनी राजनीतिक महत्व के लिए विदेशी भूमि का सहारा ले रहे है.पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अब उन्हीं के मुखर अंदाज में राहुल गांधी भी देश छोड़ विदेशों में अपनी राजनीति वर्चस्व दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है. लगातार एक के बाद एक मोदी सरकार पर हमले बोल रहे है. जिस राहुल गांधी के भाषण को उनके अपने पार्टी के नेता ही महत्व नहीं देते थे, भाजपा अक्सर राहुल के भाषणों की हंसी उड़ाती थी, आज वही भाजपा राहुल गांधी के विदेशी हमलों से सकते में आ गयी है. राहुल गांधी का इसतरह से मोदी सरकार को उन्हीं के अंदाज मे घेरना राजनीति के कई अहम मायनों की तरफ इशारा करते है. अभी राहुल गांधी दो हफ्ते के अमेरिका दौरे पर हैं. वो ग्लोबल थिंकर्स, अमेरिकी नेताओं, दक्षिणी एशियाई मामलों के एक्सपर्ट और अमेरिका में बसे भारतीयों से मिल रहे हैं साथ ही खुले मंच से सरकार की आलोचना भी कर रहे है. मेडिसिन स्कवायर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा कि देश में विभाजनकारी राजनीति विदेश में भारत की शांति और सौहार्द की छवि बिगाड़ रही है. मोदी सरकार पर तंज कसते हुए राहुल ने कहा कि मौजुदा सरकार देश में बढ़ रही असहिष्णुता के लिए जिम्मेदार है.  उन्होंने कहा कि उनके मौजूदा अमेरिका दौरे के दौरान लोग उनसे पूछते हैं,”भारत में वर्षो से मौजूद सहिष्णुता का क्या हुआ? सौहार्द का क्या हुआ? हजारों वर्षों से भारत की शांति और सौहार्द से परिपूर्ण छवि रही है लेकिन अब इसे चुनौती दी जा रही है. हमारे देश में ऐसी कई ताकते हैं जो देश को बांट रही हैं। यह देश के लिए बहुत खतरनाक है और इससे विदेश में देश की छवि बिगड़ी है. विभाजनकारी राजनीति जारी है और इसका मुकाबला किया जाना चाहिए. राहुुुल यही नहीं रूके उन्होंने मोदी सरकार पर चौतरफा हमले किये. नोट बंदी, बेरोजगारी से लेकर मेक इन इंडिया पर राहुल गांधी ने सरकार पर कड़े प्रहार किये. वंशवाद को लेकर लग रहे आरोप पर भी राहुल ने अपना पक्ष साफ किया कि मोदी सरकार में भी परिवारवाद की परंपरा रही है। मुलायम से लेकर अमिताभ बच्चन तक को भी राहुल गांधी ने परिवार वाद पर नहीं छोड़ा. दरअसल अब यह सवाल उठने लगा है कि राहुल गांधी के इस तरह से नए रूख के राजनीतिक मायने क्या है? क्यों राहुल गांधी के विदेशी दौरे को इतनी तवज्जों मिल रही है? क्या वास्तव में मोदी सरकार सकते में आ गयी है? ऐसे प्रश्न उठना लाजमी भी है. जिस तरह से सरकार में आने के बाद मोदी अपने विदेश दौरों पर कांग्रेस सरकार को भ्रष्टाचार से लेकर परिवारवाद के मसले पर घेरते थे, आलोचना करते थे . अब राहुल गांधी ने भी मोदी को उसी अंदाज में जवाब देना शुरू किया है. जिस राहुल गांधी को भारत में पप्पू कह मजे लिये जाते थे. अमित शाह से लेकर विश्वास सारंग जैसे नेता अक्सर राहुल के भाषणों की खिल्लियां उडा़ते थे. आज उसी राहुल गांधी को मिल रही मीडिया कवरेज और विदेशों में हो रही प्रशंसा से मोदी सरकार निश्चिंत ही सोचने पर मजबूर हुई है.

दोनों दलों के बड़े नेताओं का एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाना देश में तो ठीक था पर भारत से बाहर जाकर एक दूसरे पर हमला करना सामान्य राजनीति घटना नहीं है. इस तरह के हथकंडे से इतना तो साफ है कि देश के अंदर अपनी खिसकी हुई विरासत को वापस उठाने के लिए विदेशी जमीन तलाशे जाने लगी है.