Posted in News

आदि शंकराचार्य की जयंती आज : मोहन भागवत सहित कई हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि


एमटीटी नेटवर्क। आज देशभर में आदि शंकराचार्य की जयंती मनायी जा रही है. इस मौके पर देश में कई जगहों पर कार्यक्रम आयोजित किया गया. आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने चिन्मय विभूति, पुणे में शंकराचार्य की प्रतिमा पर पुष्पार्चन किया. उनकेे साथ हुए सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी भी उस्थित रहे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ सहित कई हस्तियों ने शंंकराचार्य को नमन कर पुुष्पार्चन किया.

कौन थे शंकराचार्य : 

ऐसा माना जाता है कि आदि शंकराचार्य अद्वैत वेदांत के प्रणेता, संस्कृत के विद्वान, उपनिषद व्याख्याता और सनातन धर्म सुधारक थे. धार्मिक मान्यता में इन्हें भगवान शंकर का अवतार भी माना गया है. उनका जन्म केरल के कालडी ग्राम’ में हुआ था. मात्र 8 साल की उम्र में वह मोक्ष की प्राप्ति के लिए घर छोड़कर गुरु की खोज में निकल पड़े थे. 32 साल के जीवनकाल में उन्होंने कई उपलब्धियां अर्जित कीं. इन्होंने लगभग पूरे भारत की यात्रा कर भारत के चारों कोनों में मठों की स्थापना की .

यह भी पढ़े : देश को संगठित करने के लिए संघ की पांच दिवसीय बैठक शुरू…

[pfc layout=”layout-one” cat=”1″ order_=”date” order=”DESC” post_number=”5″ length=”10″ readmore=”Read More” show_date=”false” show_image=”true” image_size=”medium”]

Posted in News

अर्थशास्त्र को किसी एक थ्योरी तक सीमित नहीं रख सकते : मोहन भागवत

एमटीटी नेटवर्क। देश- काल परिस्थिति के अनुसार अर्थव्यवस्था और उसकी नीतियां बदलती रहती है. अर्थशास्त्र जीवन की बात है. हम इसे किसी वाद या थ्योरी तक सीमित नहीं रख सकते हैं. भारत को पूंजीवाद या समाजवाद जैसे वाद से बाहर निकलना होगा. किसी भी नीति की सफलता आंकड़ों में नहीं बल्कि इन आंकड़ों से होने वाले फायदे में है. यह विचार सर संघचालक मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित एक समारोह के दौरान कही. वह गोखले इंस्टीट्यूट आॅफ इकोनॉमिक रिसर्च और बम्बई स्टाक एक्सचेंज की तरफ से आयोजित समारोह में भारतीय अर्थव्यवस्था और आर्थिक नीतियां : दीर्घकालिक परिदृश्य ’’ विषय पर विशेष व्याख्यान दे रहे थे.

मोहन भागवत की बड़ी बातें : 

किसी भी नीति की सफलता इस बात पर निर्भर है कि वह लोगों की किस तरह से मदद करता है.

हमें अपने लोगों को के लिए आधुनिक आर्थिक नीतियों को लागू करना होगा. हमें अंतहीन मांग बढ़ाने से बचना होगा. इसके बजाय हमें संयम के साथ उपभोग की नीति पर चलना होगा.

सिर्फ सुरक्षा और समृद्धि ही सुख का प्रतिक नहीं है. इनके साथ शांति और संतुष्टि भी जरूरी है.

एयर इंडिया को लेकर मोहन भागवत ने कहा कि हमें अपने आकाश पर किसी का प्रभुत्व  स्वीकार नहीं करना चाहिए. बेहतर होगा कि एयर इंडिया को कोई भारतीय कंपनी ही चलाए.