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भारतीय जीवन दृष्टि किसी में भेद नहीं मानती : जे. नंदकुमार


भोपाल, 07 दिसंबर।भारतीय दृष्टि समूची सृष्टि को ईश्वर ही मानती है। मनुष्य मात्र में ही नहीं, अपितु प्रकृति के प्रत्येक तत्व- पेड़-पौधे, पक्षी, ग्रह-नक्षत्र, पृथ्वी, समुद्र एवं पहाड़, सबमें ईश्वर का ही अंश है। सबमें एक ही ब्रह्म है। इसलिए भारतीय ज्ञान परंपरा में सबके साथ आत्मीय संबंध देखे गए हैं। अन्यत्र किसी विचार-संस्कृति में प्रकृति के प्रति ऐसा दृष्टिकोण नहीं है। यह विचार अखिल भारतीय प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक श्री जे. नंदकुमार ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय ज्ञान संगममें व्यक्त किए।

जीवन की भारतीय दृष्टिविषय पर अपने उद्बोधन में श्री जे. नंदकुमार ने कहा कि हम अपने भीतर जिस प्रकाश को देखते हैं, दूसरे के भीतर भी उसी प्रकाश के अस्तित्व को स्वीकारते हैं। भृतहरि ने अपने वैराग्य शतक में प्रकृति की ओर संकेत करते हुए लिखा है कि आकाश मेरा भाई है। पृथ्वी मेरी माता है। वायु मेरे पिता हैं और अग्नि मेरा मित्र है। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन में प्रकृति को आनंद का बगीचा नहीं माना, बल्कि इसके साथ आत्मीय संबंध बनाए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन के आधार पर सभी विषयों के प्रति हमारी मौलिक मान्यताएं हैं। उन मौलिक मान्यताओं के आधार पर आज विमर्श करने की आवश्यकता है।

श्री नंदकुमार ने कहा कि विश्व में भारतीय जीवन दृष्टि है,जहाँ स्त्री-पुरुष की रचना एवं कल्पना एकसाथ एक ही तत्व से मानी जाती है। यहाँ स्त्री-पुरुष में कोई भेद नहीं माना गया है। दोनों को एक-दूसरे के समान एवं पूरक माना गया है।भारतीय परंपरा में सर्वे भवंतु सुखिन: का विचार किया गया है।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि भारतीय ज्ञान-दर्शन के प्रति दुनिया में जिज्ञासा बढ़ रही है। यूरोप के लगभग प्रत्येक विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान का अध्ययन किया जा रहा है। भारतीय ज्ञान का अध्ययन करते समय यूरोप के विद्वानों का दृष्टिकोण यूरोपीय ही होगा, इसलिए भारतीय ज्ञान अपने मूल रूप में सामने आएगा, इसकी संभावना अधिक नहीं है। ऐसे में हमारे सामने चुनौती है कि हम अपने ज्ञान को भारतीय दृष्टिकोण से दुनिया के सामने लाएं। अपने विषय के क्षेत्र में भारतीय दृष्टि से शोध एवं अध्यापन कराएं और उसे पाठ्यक्रम में शामिल कराने के प्रयत्न करें।

कार्यक्रम का उद्घाटन प्रख्यात साहित्यकार पद्मश्री डॉ. नरेन्द्र कोहली, उच्च शिक्षा मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया एवं कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने किया। आपको बता दें कि दो दिनों तक चलने वाले इस  कार्यक्रम का समापन 8 दिसंबर को होगा जिसमें मुख्य वक्ता प्रख्यात चिंतक एवं विचारक डॉ. कृष्ण गोपाल और विशिष्ट अतिथि जनसंपर्क एवं जलसंसाधन मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा होंगे।

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कार्यक्रम का उद्घाटन प्रख्यात साहित्यकार पद्मश्री डॉ. नरेन्द्र कोहली, उच्च शिक्षा मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया एवं कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने किया। आपको बता दें कि दो दिनों तक चलने वाले इस  कार्यक्रम का समापन 8 दिसंबर को होगा जिसमें मुख्य वक्ता प्रख्यात चिंतक एवं विचारक डॉ. कृष्ण गोपाल और विशिष्ट अतिथि जनसंपर्क एवं जलसंसाधन मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा होंगे।

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वैचारिक मतभेद हो सकते है पर जनसरोकारों के साथ मतभेद नहीं : जे नंद कुमार

माय टाइम्स टुडे। भोपाल, 07 दिसम्बर। प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक श्री जे. नंद कुमार ने कहा कि पत्रकारों का यह दायित्व है कि वह वैचारिक दृष्टि से उपर उठकर सामाज में शांति बनाए रखने के लिए कार्य करें। आपस में वैचारिक मतभेद हो सकते है पर जनसरोकारों के साथ मतभेद नहीं होना चाहिए। पत्रकार को संस्थान और स्वयं के विचार के प्रति जवाबदेह न होकर जनता के प्रति समर्पित रहना चाहिए। वह विश्व संवाद केंद्र, भोपाल की ओर से आयोजित ‘वर्तमान समय में कलम और विचार का द्वंद्ध विषय पर संगोष्ठी एवं विशेषांक ‘अनथक कलमयोद्धा’ के विमोचन कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे

श्री नन्दकुमार ने पंडित नेहरू का नाम लेकर कहा कि आज कांग्रेस जिस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात कर रही है उस पर पहला प्रतिबंध नेहरू ने ही लगाया था। उन्होंने कहा कि नेहरू के सविंधान संशोधन का ही परिणाम था कि इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया।

वहीं इस अवसर पर राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष श्री बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि आज की पत्रकारिता में भारतीयता का बोध होना जरूरी है। अगर पत्रकारिता में भारतीयता का बोध नहीं होगा तो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ खतरे में पड़ जाएगा। हमारी आरंभिक पत्रकारिता ने भाषाई पत्रकारिता के माध्यम से राष्ट्रीयता का अलख जगाने का कार्य किया है। उन्होंने वर्तमान पत्रकारिता के संदर्भ में कहा कि आज खबर होती नहीं है, जबरन बना दी जाती है। आज अधिकांशत: मीडिया संस्थानों में विदेशी पैसे लगे हैं ऐसे समय में वह भारतीय हितों की रक्षा कैसे करेगी। आज जेएनयू में भारतीय विचारों को प्रदूषित करने का जो षडयंत्र चल रहा है उसकी पोल खुल गयी है। आज के दौर में यह जरूरी हो गया है कि पत्रकारिता में जनसरोकारों को शामिल किया जाए।

अनथक योद्धा‘ विशेषांक की प्रस्तावना रखते हुए वरिष्ठ पत्रकार श्री गिरीश उपाध्याय ने अपने उद्बोधन में कहा कि पत्रकारों को वाम पंथ और दक्षिण पंथ के वैचारिक द्वंद्ध में न पड़कर वही करना चाहिए जो सामाज के हित में हो। श्री उपाध्याय ने बताया कि उनके दौर में यह द्वंद्ध नहीं था पर आज मीडिया संस्थानों में यह द्वंद्ध देखने को मिल रहा है। हमें अपने आचरण को इतना शुद्ध रखना चाहिए कि वैचारिक टकराहट की बजाए सामंजस्य बना रहे। आज यही जरूरी है कि विचारों को आत्मसात करने की बजाए अभिव्यक्ति के नाम पर खिलवाड़ बंद होना चाहिए।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक अशोक पांडे, मध्यप्रदेश शासन के लोक निर्माण विभाग के मंत्री रामपाल सिंह, विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष लक्ष्मेन्द्र महेश्वरी, कार्यकारी अध्यक्ष अजय नारंग एवं निदेशक डॉ. राघवेन्द्र शर्मा आदि उपस्थित रहे।