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शिक्षा का कांग्रेसीकरण, पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति का जबरन लिया इस्तीफा

सत्ता में आते ही कांग्रेस ने शिक्षा का कांग्रेसीकरण शुरू कर दिया। एक वरिष्ठ और सपर्पित पत्रकार जिन्होंने इंडिया टूडे, जनसत्ता जैसे देश के बड़े समाचार समूहों में वर्षों तक कई अहम पदों को सुशोभित किया,उस विलक्षण कुलपति को कांग्रेस की सरकार ने मानसिक रूप से प्रताड़ित कर इस्तीफा ले लिया। जी हां मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने सत्ता में आते ही माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय को निशाने पर लेते हुए कुलपति जगदीश उपासने पर दबाव बनाकर इस्तीफा ले लिया। निश्चित रूप से कांग्रेस की यह साजिश विश्वविद्यालय के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। एक ऐसे समय में जब पत्रकारिता विश्वविद्यालय को एक विलक्षण संपादक कुलपति के रूप में मिला, जिन्होंने पदभार ग्रहण करते ही छात्रों की प्रतिभा को तराशने का काम शुरू किया, थ्योरी के साथ- साथ प्रैक्टिकल शिक्षा पर जोर दिया, छात्रों को सक्षम पत्रकार बनाने का प्रशिक्षण देना शुरू किया तब कांग्रेस ने द्वेष की भावना से कुलपति का इस्तीफा ले लिया। निश्चित रूप से विश्वविद्यालय के छात्रों के लिय यह दुर्भाग्यपूर्ण है, छात्रों के लिए काला दिन है। जिस व्यक्ति ने वर्षों तक जनसत्ता जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्र में काम किया, जिन्होंने प्रभाष जोशी, प्रभु चावला जैसे श्रेष्ठ पत्रकारों के साथ काम किया, जिन्होंने इंडिया टूडे समूह में 25 वर्ष तक सेवाएं दी, ऐसे पत्रकार की निष्पक्षता पर सवाल कैसा….एक विलक्षण कुलपति का जबरन इस्तीफा सत्ता और शासन का दुरुपयोग नहीं है तो और क्या है। आज कुलपति का इस्तीफा हुआ है, कई अन्य अधिकारियों पर सरकार दबाव बना रही है। अगर यह सरकार इसी तरह कुंठित मानसिकता से काम करती रही तो विश्वविद्यालय का पतन हो जाएगा। विश्वविद्यालय के छात्रों को आगे आकर सरकार के द्वेषपूर्ण फैसले के खिलाफ आवाज उठानी होगी, अपने विश्वविद्यालय की रक्षा करनी होगी….

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जिसे इतिहास का ज्ञान नहीं वो भारत का निर्माण नहीं कर सकता- राकेश सिन्हा

एमटीटी भोपाल। भोपाल में आयोजित यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता एवं विचारक प्रो. राकेश सिन्हा ने कहा कि जब व्यक्ति का वर्तमान कमजोर होता है तो वह अपनी विरासत में अपनी छवि देखता है और अपनी कमजोरी को विरासत की समृद्धि में छिपा लेता है। हमारे वेद-उपनिषद में क्या कहा गया है, यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि हम आज क्या कह रहे हैं। उन्होंने बताया कि हमें अपने भविष्य को बनाने के लिए अपने इतिहास का अध्ययन करना चाहिए।

प्रो. सिन्हा ने इतिहास के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इतिहास विस्मृत करने के लिए नहीं है, स्मृति के लिए होता है। अब तक ऐसा इतिहास पढ़ाया गया, जो हमें विस्मृति देता है। भारत के विभाजन की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश को सिर्फ 1947 में नहीं बाँटा गया,बल्कि भारत उसके पहले और बाद में भी विभाजित हुआ है।1962 में हमने अपनी जमीन खोई। 1937 में बर्मा भारत से अलग हुआ। उन्होंने बताया कि हमारे इतिहास में यह जिक्र नहीं है कि बर्मा किस प्रकार भारत से अलग हुआ। बर्मा को अलग करने के लिए जब जनमत कराया गया, तब 51 प्रतिशत से अधिक लोगों ने कहा था कि वह भारत के साथ रहना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास को योजनापूर्वक धूल-धूसरित कर दिया गया है। जिस भारतीय को अपने इतिहास का सही ज्ञान नहीं है, वह भारत का निर्माण नहीं कर सकता। राष्ट्र को जानने के लिए सबसे पहले प्रत्येक भारतीय को यह जानना होगा कि वह कौन है? प्रो. सिन्हा ने महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए बताया कि गांधीजी ने कहा था कि अंग्रेजी की किताबों का अनुवाद करने वाले कभी भी भारत का निर्माण नहीं कर सकते। हमें अपनी ज्ञान-परंपरा में उपलब्ध शास्त्र पढऩे होंगे और नये शास्त्र रचने होंगे।

नये और मौलिक विचार प्राप्त करना चाहता है युवा :

प्रो. सिन्हा ने कहा कि भारत का युवा नये और मौलिक विचार को प्राप्त करना चाहता है। उन्होंने कहा कि न थकने वाला और न हारने वाला युवा ही भारत को आगे बढ़ा सकता है। भारतीयता के संबंध में उन्होंने कहा कि भारत में जो भोग के उद्देश्य से आए,उन्होंने कभी इस देश को अपना नहीं माना। भारत ने भी उन्हें कभी स्वीकार नहीं किया। जो भारतीय बनकर आएगा, उसे हम स्वीकार करेंगे और जो अभारतीय बनकर आएगा, उसे बाहर कर देंगे। उन्होंने बताया कि भारत में ‘संगम’ का बहुत महत्व है। हम माँ गंगा या नर्मदा में स्नान से जो पुण्य मिलता है, उससे भी अधिक महत्व ‘संगम’ में स्नान का है। हमें ऐसे भारत का निर्माण करना है, जिसमें सामाजिक न्याय हो, समरसता और समानता हो।

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युवाओं ने की थिंक टैंक के प्रतिनिधियों से चर्चा :

यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव में पहले दिन विभिन्न थिंक टैंक के प्रतिनिधियों के साथ युवा प्रतिभागियों ने चर्चा की। सीआईएस के पंकज सक्सेना, इंडिया फैक्ट के नितिन श्रीधर और स्वराजमार्ग के अरिहंत पावरिया ने युवाओं को विभिन्न विषयों पर परामर्श दिया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांध समां :

कॉन्क्लेव में युवा प्रतिभाओं ने अपनी कला का प्रदर्शन भी किया। गीत-संगीत, नृत्य और अन्य विधाओं में अपनी प्रस्तुति से युवाओं ने सबका मन मोह लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में देश की सांस्कृतिक विविधता की झलक दिखाई दी।

कल इन विषयों पर होगी चर्चा :

12 अगस्त को बौद्धिक सत्र प्रात: 9 बजे से प्रारंभ हो जाएंगे। दूसरे दिन साई दीपक, आरवीएस मणि, राहुल रौशन, शुभ्रास्था,आलोक दुबे, कविता पाटीदार, अनुग्रह नागायिच और आशीष अग्रवाल सहित अन्य विद्वान युवाओं के साथ चर्चा करेंगे। सेवा,सामाजिक सुधार, महिला नेतृत्व, बौद्धिक नेतृत्व, उद्योग एवं व्यापार में युवाओं की भूमिका पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके साथ ही इस बात पर भी चर्चा होगी कि सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक विमर्श की गुणवत्ता को कैसे सुधारा जा सकता है। वहीं, दूसरे दिन प्रज्ञाता, सृजन फांउडेशन, इंडिया फांउडेशन, इंडिक कलेक्टिव, ओपी इंडिया, निमित्तेकम, इंडिया इंस्पायर, गरुड प्रकाशन और प्रज्ञा प्रवाह के प्रतिनिधि क्रमश: आशीष धर, राहुल दीवान, रजत सेठी, साई दीपक, राहुल रौशन,ओमेन्द्र रत्नु, हर्षित जैन, अंकुर और श्रीकांत काटदरे उपस्थित रहेंगे। दो दिवसीय यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव का समापन 12 अगस्त को शाम 5:15 बजे होगा। समापन सत्र के मुख्य वक्ता प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार होंगे।

इस मौके पर कार्यक्रम की अध्यक्ष राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, प्रख्यात लेखक अरविन्दन नीलकंदन,प्रख्यात लेखक संक्रांत सानु ,माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के कुलपति जगदीश उपासने,  सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता मोनिका अरोरा आदि गणमान्य हस्तियां उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन अपूर्वा मुक्तिबोध ने किया और धन्यवाद ज्ञापन कॉन्क्लेव के संयोजक डॉ. संजीव शर्मा ने किया।