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एमटीटी। कविता।  मां हमारी चांद, और हम उसके तारे थे। वो बचपन के दिन भी , तमन्नाओं के पिटारे थे। कभी हवा के जहाजों में तैरने का सपना। कभी टाफियों की बरसात की उम्मीद पनपना। कुल्फी और फुल्की, हमारे शाही भोजन थे। एक छोटा सा राज्य हमारा,और हम उसके राजन […]