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पं बृजलाल द्विवेदी सम्मान: कवि पैदा होते है,बनाए नहीं जाते : डॉ विजय बहादुर


भोपाल। कवि पैदा होते है, बनाए नहीं जाते है.कवि तो नैसर्गिक होते है वह किसी संस्थान में तैयार नहीं किये जा सकते है.मीडिया विमर्श की तरफ से आयोजित पं बृजलाल द्विवेदी सम्मान समारोह में मुख्य वक्ता के तौर पर उपस्थित प्रख्यात समालोचक डॉ विजय बहादुर सिंह ने कहा कि साहित्य कभी मरता नहीं है. उसका अस्तित्व हमेशा बना रहता है.साहित्य तो समय काल से ऊपर उठकर अजर अमर होता है. रामायण और महाभारत हमारी साहित्यिक संस्कृति की पहचान रहे हैं. उन्होंने साहित्यिक पत्रकारिता की बात करते हुए कहा कि कठिन परिस्थियों में भी जिस तरह से साहित्यिक पत्रकारिता ने काम किया है वह अखबारों के माध्यम से संभव नहीं है.साहित्य तो आत्मा की भाषा होती है जो अंत: करण से संवाद करती है.
शब्द ही ब्रह्म है :
श्री सिंह ने कहा कि हमारे देश में शब्द को ब्रह्म कहा गया है.वही उपनिषदों में अन्न को ब्रह्म कहा गया है.अगर अन्न नहीं हो प्राण तत्व की रक्षा नहीं हो सकती है,ठीक उसी तरह शब्द के बिना विचार तत्व की रक्षा नहीं हो सकती है.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और हरिभूमि के प्रधान संपादक हिमांशु द्विवेदी ने कहा कि हालांकि वर्तमान समय में पत्रकारिता को लेकर सवाल उठते रहे है लेकिन पत्रकारिता में आज भी मूल्य स्थापित है.जब कभी देश की बात आती है तो पत्रकारिता अपने मूल्यों से समझौता नहीं करती है.उन्हेंने कहा कि आपातकाल के समय पत्रकारों ने साहसिक कार्य किया था.
उन्होंने कहा कि अगर वर्तमान समय में कोई पत्रकारिता को विवाद बनाने की जगह सार्थक संवाद के माध्यम से राह दिखाने की कोशिश करता है तो निश्चित रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में और बेहतर किया जा सकता है.

आपको बता दें कि हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता के क्षेत्र में दिए जाने वाला पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान इस वर्ष ‘अलाव’ (दिल्ली) के संपादक श्री रामकुमार कृषक को मिला है.उन्हें यह सम्मान भोपाल के गांधी भवन में आयोजित सम्मान समारोह में दिया गया.

कार्यक्रम की अध्यक्षता माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बृजकिशोर कुठियाला ने किया. वही मंच का संचालन सुभद्रा ने किया जबकि आभार प्रकट डॉ सौरभ मालवीय ने किया.इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार सुधीर सक्सेना, डॉ श्रीकांत सिंह, मीडिया विमर्श के कार्यकारी संपादक संजय द्विवेदी सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे.

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बृजलाल द्विवेदी सम्मान से अलंकृत किए जाएंगे ‘अलाव’ के संपादक रामकुमार कृषक


माय टाइम्स टुडे। हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता के क्षेत्र में दिए जाने वाला पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान इस वर्ष ‘अलाव’ (दिल्ली) के संपादक श्री रामकुमार कृषक को दिया जाएगा. श्री रामकुमार कृषक साहित्यिक पत्रकारिता के एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर होने के साथ-साथ देश के जाने-माने संस्कृतिकर्मी, कवि एवं लेखक हैं.वे 1989 से लोकोन्मुख साहित्य चेतना पर केंद्रित महत्वपूर्ण पत्रिका ‘अलाव’ का संपादन कर रहे हैं.

प्रतिष्ठित त्रैमासिक पत्रिका ‘मीडिया विमर्श’ की तरफ से दिए जाने वाला यह पुरस्कार इस वर्ष 4 फरवरी को भोपाल के गांधी भवन में आयोजित सम्मान समारोह में दिया जाएगा. पिछले साल यह प्रतिष्ठित सम्मान अक्षरा (भोपाल) के संपादक कैलाशचंद्र पंत को दिया गया था.

इसके पूर्व यह सम्मान वीणा (इंदौर) के संपादक स्व. श्यामसुंदर व्यास, दस्तावेज (गोरखपुर) के संपादक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, कथादेश (दिल्ली) के संपादक हरिनारायण, अक्सर (जयपुर) के संपादक डॉ. हेतु भारद्वाज, सद्भावना दर्पण (रायपुर) के संपादक गिरीश पंकज, व्यंग्य यात्रा (दिल्ली) के संपादक डॉ. प्रेम जनमेजय, कला समय के संपादक विनय उपाध्याय (भोपाल) संवेद के संपादक किशन कालजयी (दिल्ली) को दिया जा चुका है.

मीडिया विमर्श पत्रिका के कार्यकारी संपादक संजय द्विवेदी ने बताया कि वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु द्विवेदी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे व कार्यक्रम की अध्यक्षता माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला करेंगे. साथ ही आयोजन में अनेक साहित्कार, बुद्धिजीवी और पत्रकार हिस्सा लेंगे.

कौन हैं रामकुमार कृषकः

1 अक्टूबर, 1943 को अमरोहा (मुरादाबाद-उप्र) के एक गांव गुलड़िया में जन्मे रामकुमार कृषक ने मेरठ विश्वविद्यालय से हिंदी में एमए की उपाधि और प्रयाग विवि से साहित्य रत्न की उपाधि प्राप्त की. दिल्ली में लंबे समय पत्रकारिता की.अध्यापन और लेखन करते हुए आठवें दशक के प्रमुख प्रगतिशील-जनवादी कवियों में शुमार हुए. गजल और गीत विधाओं में विशेष योगदान के साथ-साथ कहानी, संस्मरण, साक्षात्कार और आलोचना आदि गद्य विधाओं में भी उल्लेखनीय स्थान है. सात कविता संग्रहों के अलावा विविध विधाओं में एक दर्जन से अधिक किताबें प्रकाशित. 1978 से 1992 तक राजकमल प्रकाशन में संपादक और संपादकीय प्रमुख रहे। 1989 से अलाव पत्रिका के संपादक हैं.

साल 2017 की कुछ झलकियां :