ये हमारा वतन, हमें प्राणों से प्यारा हैं, जिसे पाकर हुए हम धन्य, वह भारत हमारा हैं…… गंगा की गोद में, हम पले बढ़े हैं, हिमालय की छांव में, हम हर शिखर तक चढ़े हैं, जात धरम से ना है नाता, मजहब हैं हमारी भारत माता, इस जमीं ने, हमारा […]

आंसू दृग में आने से पहले,तुम खुशियों सा छा जाते थेखाने के डब्बों के समझौते,किसी सील बिना ही हो जाते थे।उसके बगल वाली सीट पर बस,हम अधिकार जताते थे।

फर्श है तो अर्श भी है, मुश्किलें हैं तो संघर्ष भी है, बाधाओं से डर जाऊं, यह मुमकिन नहीं, जीत जाऊं तो जश्न है, हार जाऊं तो भी गमगीन नहीं, न राह बदलूंगा, न रूह बदलूंगा, इसी काल खंड में, जमाने की दस्तूर बदलूंगा…… Indrabhushan Mishra

“बेटियां” सेवा हैं ,समर्पण हैं, उल्फत हैं बेटियां। मां- बाप पे भगवान की रहमत हैं बेटियां। बटवारे की इबादत बेटों ने जब लिखी। मां बाप के घावों पर मरहम हैं बेटियां। ज़ालिम सी ज़िन्दगी जब भी सताने लगी। कामों की व्यस्तता में फुरसत हैं बेटियां। ग़रीबी में भी राजा, जो […]

मां मेरी… ———— मां मुझे तुम सबसे प्यारी, तुमसे जानी दुनिया सारी अच्छा-बुरा सब मैं न जानूं, मां मैं तुमको बस अपना मानूं मैंने तुमसे जन्म है पाया, तुमने ही संसार दिखाया मां मुझे तुम सबसे प्यारी, तुमसे जानी दुनिया सारी मां मैं जब-जब देखूं तुमको, मिलती खुशियाँ मेरे मन […]

तबीयत ठीक है मेरी”, इस झूठ को एक पल में पकड़ लेते हैं। सलीके से बोली गई बात को पापा ना जाने कैसे पढ़ लेते है। दवाएं खीज जाती हैं, आपकी दुआओं का असर देखकर। सर पर हाथ आपका है,तो हम मौतों से भी लड़ जाते हैं। आपके कंधों की […]

एमटीटी। कविता।  मां हमारी चांद, और हम उसके तारे थे। वो बचपन के दिन भी , तमन्नाओं के पिटारे थे। कभी हवा के जहाजों में तैरने का सपना। कभी टाफियों की बरसात की उम्मीद पनपना। कुल्फी और फुल्की, हमारे शाही भोजन थे। एक छोटा सा राज्य हमारा,और हम उसके राजन […]

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