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कविता : बचपन वाली यारी….

आंसू दृग में आने से पहले,तुम खुशियों सा छा जाते थेखाने के डब्बों के समझौते,किसी सील बिना ही हो जाते थे।उसके बगल वाली सीट पर बस,हम अधिकार जताते थे।

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