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14 फरवरी को पुलवामा में आतंकी हमला हुआ और हमारे 40 सीआरपीएफ के जवान शहीद हो गए। इस घटना के बाद देश भर में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन किए गए और पाक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। जब देश गम में डूबा था उस समय भी कुछ नेता घटिया राजनीति करने से बाज नहीं आए। घटना के बाद कांग्रेस ने मोदी की एक तस्वीर जारी कर लोगों के बीच खूब भ्रम फैलाया। लेकिन सच तो यह है कि हमले के समय राहुल गांधी स्वयं सभा को संबोधित कर रहे थे और जश्न मना रहे थे।

दरअसल पीएम मोदी उत्तराखंड के रुद्रपुर में एक रैली को संबोधित करने वाले थे। इसी क्रम में उन्हें जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व भी जाना था। कांग्रेेेस ने यह आरोप लगाया है कि जब देश गम में था तब पीएम मोदी फोटो शूट करा रहे थे। इतना ही  नहीं कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ प्रोपेगंडा फ़ैलाने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी आयोजन किया।

हमने पूरी पड़ताल की और यह जानने का प्रयास किया कि सच क्या है। दरअसल मोदी खराब मौसम की वजह से रैली स्थल पर नहीं जा पाए और फोन से ही उन्होंने रैली को संबोधित किया।पुलवामा आत्मघाती हमला लगभग 3:30 बजे हुआ और कांग्रेस का दावा है कि मोदी शाम 6 बजे के बाद तक भी फोटो खिंचवा रहे थे।

लेकिन कांग्रेस आरोप बेबुनियाद और झूठ है। 14 तारीख की खबरों को देखें तो मोदी करीब दोपहर बाद दो बजे पार्क में पहुंच गए थे। कांग्रेस ने जिस तस्वीर का प्रयोग किया है, वह उसी समय की है। इतना ही नहीं मौसम खराब की वजह से मोदी जल्द ही पार्क से वापस भी लौट गए। खराब मौसम की वजह से पीएम को हमले की सूचना भी देर से मिली। ऐसे में यह साफ है कि कांग्रेस का आरोप झूठा है।

 

टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कॉन्ग्रेस की तरफ से जारी तस्वीर 6 बजे की नहीं है। 14 फरवरी के दिन की खबरों और दूरदर्शन के फुटेज भी कांग्रेस के दावे को खारिज करते हैं।

हमले के वक्त नाच में मगन थे राहुल गांधी : 

इधर जवान शहीद हो रहे थे और उधर राहुल गांधी नाच में मगन थे। आप इस वीडियो को देखिए और वक्त भी देखिए। कहीं ऐसा तो नहीं कि राहुल गांधी पर कोई सवाल करे इससे पहले उन्होंने मोदी को टारगेट कर लिया। इस वीडियो को लेकर भी उन लोगों को सामने आना चाहिए और देश को सच बताना चाहिए, जिन्होंने मोदी की झूठी खबरें चलाई।

अब इस वीडियो के बाद कांग्रेस को यह भी साफ करना चाहिए कि जब जवान शहीद हो रहे थे ,तब राहुल गांधी भाषण क्यों दे रहे थे ? वह रैली को संबोधित क्यों कर रहे थे। क्या तब देश गम में नही डूबा था।

 

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लेखक फक्कड़ पत्रकार है। विभिन्न विषयों पर बेहिचक लिखना लेखक की आदत है। कविताएं, कहानियां और ऊपर से राजनीति के विषयों पर नेताओं को आईना दिखाना लेखक का धर्म है। लेखक किसी मोह माया में नहीं पड़ता है और नहीं किसी के प्रलोभन का जरा भी उसे असर होता है।

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