जावेद अख्तर आजकल अपने इन बयानों की वजह से छाये हुए है

माय टाइम्स टुडे। जय और वीरू के किरदार को जीवंत करने या यूं कहे कि जय और वीरू फिल्मी दुनिया से असली दुनिया में लाने वाली सलीम-जावेद की जोड़ी बेमिसाल है। इसी जोड़ी में से जावेद अख्तर कमाल के लेखक है जो अतुलनीय कविता लिखते है। जावेद अख्तर साहब को अपने शानदार कार्य के लिए पद्म पुरस्कारों से नवाज़ा गया है और साथ ही साथ उर्दू भाषा  में लेखन के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है। जावेद आज भी अपने कार्य करने की कला के लिए प्रसिद्ध है परंतु वे एक और चीज के लिए प्रसिद्ध है, उनका बेबाकी से बयान देना।

जब अकबर रोड़ का नाम बदलकर महाराणा प्रताप रोड़ करने की बात कही गई तो उन्होंने बेबाकी से अपनी राय रखी कि यदि भारत में महान पुरूषों की सूची तैयार की जाए तो वह अकबर के बगैर पूरी नहीं हो सकती है। जो लोग अकबर के अस्तित्व को नकारते है तो उनकों इतिहास दुबारा पढ़ना चाहिए।

सद्गुरू जग्गी वासुदेव जी ने शाहजहां के लिए दिए बयान पर भी जावेद अख्तर जी ने अपनी राय जाहिर कि ट्वीट किया कि

‘Hieght of ignorance n prejudice Sath guru Jaggi says.Shah Jahan didn’t send wealth out of India because in those times  there were no ships’
 यह तो पूर्वाग्रह और नकारने की हद हो गयी। सद्गुरू जग्गी कहते है कि शाहजहां भारत से बाहर धन इसलिए नहीं भेज पाया क्योंकि उस समय जहाज नहीं थे।

जब संगीत सोम ने दुनिया के सात अजूबे में से एक ताजमहल  और बनाने वाले पर बयान दिए तो जावेद जी कड़ी आपत्ति जताई साथ ही ट्वीट किया कि

‘Sangeet Som’s ignorance of history is really monumental. Will some one give him any history book that is taught in sixth standard.’
संगीत सोम का इतिहास को नकारना सच में आश्चर्यजनक है। कोई इन्हें इतिहास की किताब दे  जो छठवी कक्षा में पढ़ाई जाती है। 

जावेद अख्तर एक महान गीतकार, साहित्यकार, पटकथालेखक के साथ-साथ एक विचारक भी है। समय-समय पर वे सामाजिक घटनाओं के विषय में अपनी राय देते रहते है। कभी-कभी यह राय विवाद का कारण भी बन जाती है। कुछ समय पहले एक खबर आई थी कि म्यानमार के राखइन प्रांत में एक हिंदु कब्रिस्तान मिला है। इस पर जावेद अख्तर ने ट्वीट किया कि

‘If there is a mass grave of Hindus  it must be  their Army ‘s doing . Or why hundreds of Hindus are also escaping along with Rohingyas.’
यदि वहां हिंदुओं की कब्र मिली है तो यह जरूर वहां की आर्मी ने किया होगा। ऐसा नहीं तो फिर क्यों सैकड़ों की संख्या में हिंदु रोहिंग्या साथ भाग रहे हैं।
इस बयान पर लोगों ने जावेद अख्तर को जमकर घेरा और कड़ी आपत्तियों  का सामना करना पड़ा।

कुछ काले बादल सूर्य को छिपा नहीं सकते हैं। वैसे ही जावेद अख्तर का राष्ट्रप्रेम छलकता रहता है।चाहे फिर वह संसद में दिया हुआ अंतिम भाषण हो या राष्ट्रगीत के लिए अपना समर्थन देना हो। राष्ट्रगान के समर्थन में ट्वीट करते हुए कहा कि

‘we have so many identities but when we stand up for our national anthem with love n reverence in that precious moment we are only Indians.’
भले ही हमारी पहचान अलग-अलग हो परंतु जब हम अपने राष्ट्रगान के लिए प्रेम और श्रद्धा के साथ खड़े होते है तो उस मूल्यवान क्षण में हम भारतीय होते हैं।

यही जावेद अख्तर साहब जो अपनी निड़रता के लिए जाने जाते है।

विनय कुशवाहा ।

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