नोटबंदी की बरसी पर पैराडाइज पेपर्स का तोहफा :इधर सरकार भी जश्न की तैयारी में


MY TIMES TODAY. आज देश में नोटबंदी की बरसी मनाई जा रही है. बीजेपी इसे कालाधन विरोधी दिवस का नाम दे रही है. वैसे भी मोदी सरकार इस मौके पर जश्न का कोई मौका गंवाना भी नहीं चाह रही है. जिसतरह से मोदी सरकार और बीजेपी को नोटबंदी के बाद यूपी में जनमत मिला था उसी बहाने जश्न मनाकर गुजरात और हिमाचल में जनमत संग्रह की कोशिश भी है. लेकिन नोटबंदी की बरसी के मौके पर पैराडाइज पेपर्स ने मोदी सरकार के कालाधन विरोधी दिवस के जश्न पर सवाल खड़े कर दिये है.
दरअसल चंद दिनों पहले अंतरराष्ट्रीय कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट आइसीआइजे ने पैराडाइज पेपर के दस्तावेज जारी किये हैं, जिसमें दुनिया भर के प्रभावी लोगों के नाम शामिल हैं. इस पेपर के अनुसार, कथित रूप से टैक्स बचाने के लिए प्रभावी लोगों ने टैक्स हेवन देशों में निवेश किया. इस सूची में भारत के 714 लोगों व संस्थाओं के नाम हैं. इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेशन 70 देशों के 200 पत्रकारों का नेटवर्क है, जो गहराई में जाकर खोजी रिपोर्ट जुटाते हैं. पत्रकारों के इस वैश्विक नेटवर्क की स्थापना 1997 में अमेरिकी पत्रकार चुक लेविस ने की थी.पैराडाइज पेपर खुलासे के लिए दुनिया के 180 देशों से 1.34 करोड़ दस्तावेज जुटाये गये. पैराडाइज पेपर खुलासा करने में दुनिया भर की 95 मीडिया संस्थाएं भागीदार रही हैं. आपको बता दें कि पनामा पेपर्स के बाद यह अबतक का सबसे बड़ा खुलासा माना जा रहा है. इस पेपर्स में भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा, बिहार बीजेपी नेता आर कें सिंह, अमिताभ बच्चन, संजय दत की पत्नी मान्यता दत के साथ देश की कई बड़े हस्तियों के नाम शामिल है. कालेधन के विरूद्ध अपनी आवाज बुलंद करने वाली मोदी सरकार पैराडाइज पेपर्स के खुलासे के बाद कटघरे में है. अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्री काले धन को लेकर भाषण देते है और जल्द ही कालाधन वापस लाने की बात पर जोर देते है. लेकिन सच तो यह है कि सरकार कालेधन को लेकर जितना बोलती है कार्रवाई के नाम पर उतनी ही खोखली भी है. लगभग सवा साल पहले 2016 पनामा पेपर्स लीक हुआ था. पैराडाइज पेपर्स का खुलासा करने वाली संस्था ने ही पनामा पेपर्स का खुलासा किया था जिसमें बीजेपी तथा गैर बीजेपी दल के बड़े नेताओं सहित अन्य हस्तियों के नाम सामने आये थे मगर अब तक किसी पर सरकार ने ठोस कार्रवाई नहीं किया. पैराडाइज पेपर्स के सामने आने के बाद सरकार ने कार्रवाई की बात तो कही है और उसके लिए मल्टी एजेंसी को जांच के लिए अनुमति भी दे दी है. लेकिन यह कोई बड़ी बात नहीं है. पनामा पेपर्स मामले में भी सरकार ने मल्टी एजेंसी को जांच करने का जिम्मा दिया था लेकिन अबतक किसी भी दोषी पर कार्रवाई नहीं हो पायी है. सरकार के कालेधन की लड़ाई की मुहिम में इतने बड़े खुलासे का सामने आना और एक से बढ़कर एक हस्तियों का शामिल होना, कालेधन के विरूद्घ लड़ाई पर सवाल खड़े करते है. एक तरफ भारत में जहां पनामा पेपर्स में कार्रवाई के नाम पर पैराडाइज पेपर्स का तोहफा मिल रहा है वही दूसरी तरफ पाकिस्तान जैसे देश में पनामा पेपर्स के सामने आने के बाद तत्कालिन पीएम नवाज शरीफ को इस्तीफा देना पड़ा था. केवल पाकिस्तान ही क्यों पनामा पेपर्स के बाद आइसलैंड के पीएम सिंगमंडर गुनलोंगसन को भी इस्तीफा देना पड़ा था वही दुनिया के अन्य देशों ने भी अपने अपने देश में कार्रवाई की लेकिन भारत कार्रवाइ के मामले में पीछे रह गया. अब प्रश्न यह है कि ‘न खाउंगा और न खाने दूंगा ‘ का नारा बुलंद करने वाली मोदी सरकार अबतक इन घोटालों पर लगाम क्यों नहीं लगा पायी है ? अगर सभी पाक साफ है तो फिर देश के गरीबों के पसीने की कमाई का गबन क्यों हो रहा है और कौन लोग कर रहें है ? कहां गयी सरकार की नोटबंदी और कालाधन वापस लाने की मुहिम? लोग पूछ रहे है कि इतने बड़े खुलासे के बाद सरकार नोटबंदी का जश्न किस हक से मना रही है. लोगों ने मर मर के लाइन में लगकर सरकार और नोटबंदी का साथ दिया मगर उन्हें मिला क्या? 

लेखक : इंद्रभूण मिश्र । 

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