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भोपाल में धूम धाम से मनाया गया राष्ट्रीय एकता दिवस, डाक विभाग ने जारी किया सरदार पटेल के नाम पर टिकट


माय टाइम्स टुडे। सोमवार, 31 अक्टूबर, भोपाल. मंगलवार को नगर के स्वराज भवन में राष्ट्रीय एकता दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग, स्वराज संस्थान और मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम पर डाक टिकट जारी किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल आलोक शर्मा एवं मुख्य वक्ता के रूप में सुप्रसिद्ध लेखक घनश्याम सक्सेना और जाने माने इतिहासकार शंभुदयाल गुरू शामिल हुए. 

आईए जानते है इस मौके पर किसने क्या कहा …

एस के पांडेय : निर्देशक डाक लेखा भोपाल
श्री पांडेय ने राष्ट्रीय एकता दिवस के मौके पर बोलते हुए कहा कि हमारा देश जब आजाद हुआ तब देश की स्थित अलग थी.उस समय देश राजनीतिक विखराव के दौर से गुजर रहा था तब सरदार जी ने देश के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने कहा कि सरदार जी अपनी राजनीति फायदे के बारे में न सोचकर आनेवाली पीढियों के लिए सोचते थे. श्री पांडेय ने बताया कि डाक विभाग हमेशा से देश की विभूतियों के नाम पर डाक टिकट जारी करता आया है. पटेल जी के नाम पर भी डाक विभाग ने कई बार टिकट जारी किया है. 2014 में राष्ट्रीय एकता दिवस के नाम पर भी डाक विभाग ने टिकट जारी किया था.
आलोक शर्मा : मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल म०प्र०
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आलोक शर्मा ने कहा कि सरदार पटेल के जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझना जरूरी है. हमें यह जानने की कोशिश करना चाहिए कि सरदार जी ने उस समय की विकट परिस्थिति में किस तरह से देश को एक सूत्र में बांधा था. आजादी के बाद देश में 562 रियासतें थी तब पटेल ने सभी को मिलाकर एक भारत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. श्री शर्मा ने कहा कि हमारे महापुरूष एक लाईन का स्लोगन बनकर न रह जाएं इसलिए इतिहास को जानना जरूरी है.
घनश्याम सक्सेना : वरिष्ठ लेखक
जानेमाने लेखक घनश्याम सक्सेना ने’ राष्ट्रीय एकता और सरदार पटेल’ विषय पर बोलते हुए कहा कि भारत हमेशा से एक राष्ट्र रहा है लेकिन एक राज्य बनाने का श्रेय सरदार पटेल को है. उन्हेंने देश को राष्ट्रीय एकता के सूत्र में जोड़ने का जो कार्य किया उसे कभी भूलाया नहीं जा सकता है. श्री सक्सेना ने महात्मा गांधी और सरदार पटेल के संबंधो पर अपनी बात रखते हुए कहा कि सरदार पटेल जहां संघर्षपूर्ण आंदोलन में विश्वास करते थे वही गांधी जी धर्म और सद्भावना को लेकर चलते थे.
शंभुदयाल गुरू : वरिष्ठ इतिहासकार
जानेमाने इतिहासकार शंभुदयाल गुरू ने देश की स्वतंत्रता में महापुरूषों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें अपने इतिहास को बार बार याद करना चाहिए. हमें स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और समर्पण से सीख लेने की जरूरत है. हम आज जो कुछ भी है वह उन महापुरूषों की कुर्बानियों के कारण ही है. सरदार जी एकता पुरूष तो थे ही साथ ही वह त्यागी भी थी. एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए शंभुदयाल ने बताया कि सरदार पटेल ने लंदन जाने का अपना टिकट अपने बड़े भाई को दे दिया था और स्वयं दो साल बाद पैसे इकट्ठे कर के गए थे. उन्होंने आगे कहा कि सरदार पटेल जैसे थे देश ने भी उनको उसी रूप में स्वीकार किया.

एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि पत्नी की मौत का समाचार मिलने के बाद भी सरदार पटेल ने कोर्ट में बहस जारी रखी थी.इससे पता चलता है कि वह कितने समर्पित थे.

पंडित नेहरू और पटेल के संबंधो को लेकर शंभुदयाल ने कहा कि कुछ लोग सरदार पटेल और नेहरू के बीच दरार की बात करते हैं लेकिन वास्तव में दोनों में बेहतर तालमेल था. सरदार पटेल जहां देश की एकता और आंतरिक स्थिति के लेकर कार्य करते थे वही नेहरू विकास के लिए कार्य करते थे. काश्मीर को लेकर उन्होंने कहा कि सरदार पटेल चाहते थे कि हिंदूओं के हिस्से वाला काश्मीर ही भारत में मिले लेकिन नेहरू चाहते थे कि पूरा काश्मीर में मिली.

इस मौके पर व्यवसाय विकास के सहायक निदेशक आर के अग्रवाल स्वराज संस्थान के सहायक संचालक संजय यादव व नगर के अन्य गणमान्य शामिल हुए. कार्यक्रम का संचालन आकाशवाणी भोपाल की उद्धघोषिका सुनिता सिन्हा ने किया. 

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