तेरी सांसों को मेरी सांसों की उमर लग जाए


तुझे देखूं तो
लगता है बस देखता रहूं,
तुझपे लिखूं तो,
जी करता है बस लिखता रहूं,
ना देखने से जी भरता है,
ना लिखने से जी थकता है,
चाहत की एक बूंद भी तुमसे है,
हसरतों का हर समंदर भी तुमसे है,
लम्हों का एक एक कारवां भी तुमसे है,
जींदगी का हर सफर भी तुमसे है,
आस भी तुमसे है,
प्यास भी तुमसे है,
जीद भी तुझपे है,
उम्मीद भी तुमसे है,
तुझे पाकर मैं और भला क्या मांगू,
बस यही दुआ है,
तेरी सांसों को मेरी सांसों की उमर लग जाए….

Mr. Indrabhushan mishra

Author profile
लेखक ,पत्रकार ,कवि

लेखक फक्कड़ पत्रकार है। विभिन्न विषयों पर बेहिचक लिखना लेखक की आदत है। कविताएं, कहानियां और ऊपर से राजनीति के विषयों पर नेताओं को आईना दिखाना लेखक का धर्म है। लेखक किसी मोह माया में नहीं पड़ता है और नहीं किसी के प्रलोभन का जरा भी उसे असर होता है।

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