‘ ना खाऊंगा न खाने दूंगा ‘ और मौन भी रहूंगा : मोदी

MY TIMES TODAY. राहुल गांधी अक्सर पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते रहते है.समय समय पर वह मोदी और उनकी सरकार को घेरने की भरपूर कोशिश करते रहते है अपने हर भाषण में मोदी पर तंज कसना उनके लिए कोई नयी बात नहीं है.लेकिन अब राहुल गांधी ने मोदी और उनकी सरकार पर जो सवाल किया है वह समान्य नहीं है.यह सरकार की साख का सवाल है.दरअसल कुछ दिन पहले द वायर नाम की एक वेबसाइट ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह से जुड़ी एक खबर छापी.इस खबर के सामने आते ही मोदी सरकार हरकत में आ गयी है.खबर में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) के आंकड़े को उद्धृत करते हुए कहा गया कि जय शाह के मालिकाना हक वाले ‘टेंपल इंटरप्राइज’ की संपत्ति में वर्ष 2015-16 के दौरान 16,000 गुना और उससे पहले के साल से करीब 80 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ. इस खबर के आने के बाद राहुल गांधी के साथ -साथ पुरे विपक्ष ने मोदी सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर सीधा सीधा हमला बोला है. राहुल गांधी ने मोदी सरकार से सवाल करते हुए पूछा कि ‘न खाऊंगा न खाने दूंगा’ की नीति पर अब सरकार खामोश क्यों है? विपक्ष का सवाल जायज भी है. जिस तरह से लोक सभा चुनावों में मोदी ने अपनी साफ सुथरी भ्रष्टाचार विरोधी छवी को आगे कर वोट बटोरा था अब उसी छवी पर सवाल उठने लगे है.इस बात में कोई संदेह नहीं है कि नरेंद्र मोदी मनमोहन सिंह की तरह एक ईमानदार नेता है और वह कोई भ्रष्टाचार सहन भी नहीं करेंगे.इसलिए लोग मोदी से इस विषय पर सफाई मांग रहे है. पर ललित गेट और वसुंधरा राजे के मसले पर चुप्पी साधने वाले पीएम इस मसले पर भी मौन है. पीएम मोदी भले ही खामोश हो पर जिस तरह से मीडिया और तमाम जन मंच पर सरकार सवालों से घिर रही है उससे पूरा मोदी कैबिनेट हरकत में आ गयी है. यह शायद पहली बार है जब सरकार निष्पक्षता से मामले की जांच कराने की बजाए अपने केंद्रीय मंत्रिमंडल को ही बचाव के पैरवीकार के रूप में मैदान में उतार दिया है. राजनाथ सिंह, अरूण जेटली, पीयूश गोयल जैसे बड़े मंत्री का बचाव के लिए सामने आना यकिनन मोदी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति को कटघरे में खड़ा कर रही है. विपक्ष की सीबीआई जांच की मांग को जिस तरह से राजनाथ सिंह ने ठुकरा दिया, उससे तो यही लगता है कि मोदी के मंत्री अब कोर्ट का काम भी करने लगे हैं. विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी का इस तरह से अपने पार्टी अध्यक्ष के बेटे को बचाने का दांव खेलना एक स्वस्थ राजनीति में कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता है.
बीजेपी के ही पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा ने सरकार की बचाव की नीति पर हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार अब जीरो टोलरेंस पर बात करने का नैतिक आधार खो चुकी है. जिस तरह से पांच राज्यों में चुनाव होने है उसको लेकर सरकार की चिंता साफ नजर आ रही है. खबर प्रकाशित करने वाली द वायर के खिलाफ मानहानी का मुकदमा करना इस बात का प्रमाण है कि सरकार इस आवाज को दबाने की भरपूर कोशिश भी कर रही है.इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा जा सकता है कि सरकार कहीं न कहीं बैकफुट पर जरूर आ गयी है.

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