क्या है गरबा ? क्यों नवरात्र में होती है गरबे की धूम


mytimestoday. शारदीय नवरात्री यानि मां दुर्गा के आगमन की खुशियां. नवरात्री आते ही चारो ओर हर्षोल्लास सा व्याप्त हो जाता है. डांडिया और गरबा की धूम नज़र आती है. क्या लड़के क्या लड़कियां, क्या बच्चे और क्या बूढे हर उम्र के लोग डांडिया और गरबे का आनंद लेते हैं. बेहद ही खूबसूरत और पारंपरिक अंदाज में सजे लोग इस नृत्य को बेहद ही खूबसूरती से अंजाम देते हैं.

आईए जानते है क्या है गरबा : 

गरबा एक अपभ्रंश है. दरअसल गरबा का संस्कृत नाम गर्भ-द्वीप है. गरबा के आरंभ में देवी के निकट सछिद्र कच्चे घट(छेद वाला कच्ची मिटटी का घड़ा) को फूलों से सजा कर उसमें दीपक रखा जाता है. इस दीप को ही दीपगर्भ या गर्भ दीप कहा जाता है. गर्भ दीप स्त्री की सृजनशक्ति का प्रतीक है और गरबा इसी दीप गर्भ का अपभ्रंश रूप है.

नाम बदला पर रीति रिवाज़ वही

जैसे-जैसे गर्भ द्वीप ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों तक पांव पसारे, इसका नाम परिवर्तित होता चला गया और अंत में इसे गरबा नाम दे दिया गया और तभी से सब लोग इस नृत्य को गरबा के नाम से ही जानते हैं. लेकिन नाम भले ही बदल गया लेकिन गर्भ द्वीप के जो रीति-रिवाज़ सर्वप्रथम किए जाते थे, वह आज भी उसी रूप में किए जाते हैं. जैसे कि गर्भ दीप के ऊपर एक नारियल रखा जाता है. नवरात्रि की पहली रात गरबा की स्थापना कर उसमें ज्योति प्रज्वलित की जाती है. इसके बाद महिलाएं इसके चारों ओर ताली बजाते हुए फेरे लगाती हैं. गरबा नृत्य में ताली, चुटकी, खंजरी, डंडा या डांडिया और मंजीरा आदि का इस्तेमाल ताल देने के लिए किया जाता है. महिलाएं समूह में मिलकर नृत्य करती हैं. इस दौरान देवी के गीत गाए जाते हैं.

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