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किसी सिद्ध पीठ से कम नहीं है नेनुआं के रामबऊरा बाबा की महिमा

कथा वाचन करते हुए जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य जी महाराज

मॉय टाइम्स टुडे। ‘कहानी मेरे गांव की‘ इस श्रृंखला की पहली कड़ी में आज हम आपको लिए चलते है बिहार के ऐतिहासिक बक्सर जिले के एक गांव नेनुआ में। बक्सर से करीब 25 किलोमिटर और डुमरांव से लगभग 6 किलोमीटर की दूर पर बसा यह गांव, एक गांव न होकर एक पवित्र धाम है। दरअसल गांव के पूरब में रामबऊरा बाबा का ऐतिहासिक मंदिर है, जिसकी महिमा अवर्णनीय है। यह मंदिर सिर्फ इस गांव के लिए नहीं बल्कि बिहार और यूपी के लाखों लोगों के लिए भी किसी पीठ से कम नहीं है। ऐसा माना जाता है कि यहां आकर जो भी बाबा से मन्नतें करता है, बाबा उसकी मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं, कोई भी भक्त कभी खाली हाथ नहीं लौटता है। यह कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं है, वास्तविकता के धरातल पर यह कोरा सच है, जिसे यहां आनेवाला हर भक्त सहजता से स्वीकार करता है।

कथा श्रवण करते हुए भक्त- जन

यहां प्रत्येक वर्ष दशहरा के समय अर्थात अश्विन (क्वार) मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि से लेकर पूर्णिमा के दिन तक भव्य यज्ञ का आयोजन होता है। जिसमें देश के बड़े – बड़े विद्वानों व संत जनों का आगमन होता है। लगातार सात दिनों तक संत जनों के मुखारविंद से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवणपान कर यहां आनेवाले भक्त भवसागर के परम् धाम को प्राप्त होते हैं। यज्ञ में पूरे सूबे से लाखों भक्तजन पधारते हैं। इस यज्ञ की महिमा किसी सिद्ध पीठ से कम नहीं है। इस ऐतिहासिक यज्ञ के बारे में सबसे रोचक किस्सा है कि कब से यहां यज्ञ हो रहा है, यह किसी को पता नहीं है। आदिकाल से यहां हर वर्ष यज्ञ होता आ रहा है। 

भक्त जनों के लिए होती है विशेष व्यवस्था : दूर दराज से आये सभी भक्तों के लिए मंदिर प्रांगण में धर्मशाला की व्यवस्था है। जहां सभी भक्तों के खाने – पीने व रहने की विशेष सुविधा रहती है।

बाबा का भक्त खाली हांथ नहीं लौटता : जो भी भक्त बाबा यहां आते हैं वो कभी खाली हांथ वापस नहीं जाते हैं। बाबा अपने भक्तों पर अपनी कृपा हमाशा बनाए रखते है।

नेनुआं वालों के लिए त्योहार की तरह होता है यज्ञ : नेनुआं गांव के लोगों के कुल देवता है बाबा। हर साल होने वाला यह यज्ञ गांव के लोगों के लिए एक विशेष त्योहार जैसा होता है। गांव के लोग कहीं भी क्यों न हो, यज्ञ के समय गांव लौट ही आते हैं।

कौन हैं बाबा रामबऊरा : रामबऊरा बाबा को अंगौरा बाबा के नाम से भी जाना जाता है। इनके इतिहास के पीछे एक सच्ची कहानी है। दरअसल गांव के बुजुर्गों के अनुसार बाबा बहुत ही पहुंचे हुए सन्यासी थे। जिनको गांव के एक भगवानुरागी सज्जन ने विशेष पार्थना कर अपने गांव बुलाया। बाबा इस गांव में रहने लगे। बाबा को उस सज्जन ने वचन दिया था कि वह गांव में बाबा की महिमा और पहचान को जग जाहिर नहीं करेंगे। परंतु विशेष परिस्थिति में एक दिन सज्जन का वचन टूट गया और तब बाबा गांव के पास ही धरती मां से याचना किये, जिसके बाद धरती फट गयी और बाबा उसमें समाधि ले लिए। जिसके बाद से गांव वाले बाबा की पूजा करने लगे और तब से लेकर हर वर्ष यज्ञ होता आ रहा है।  बाद में बाबा का विशाल मंदिर बना। अभी वर्तमान में भव्य मंदिर निर्माणाधिन है, जो इस साल के अंत तक बनकर तैयार हो जाएगा।

कैसे आयें बाबा के धाम : 

नेनुआं गांव से करीब 10 किलोमिटर दूर है डुमरांव स्टेशन, स्टेशन से नेनुआं जाने के लिए कई छोटी बड़ी गाड़ियां मिलती है। जिसके माध्यम से आप सुगमता से बाबा के धाम को जा सकते है।

रामबऊरा बाबा का समाधि स्थल