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स्वस्थ और मस्त बेटे के लिए अजमायें ये आसान उपाय

MY TIMES TODAY. गर्भावस्था एक सुखद अहसास देता है लेकिन अगर सावधानी न बरती जाय तो तमाम परेशानियां खड़ी हो जाती हैं। इसलिए जरुरी है की अगर आप प्रेगनेंसी की प्लानिंग कर रही है या प्रेग्नेंट हैं तो आपको सबसे पहले गर्भस्थ शिशु के लिए खुद को तैयार करना होगा। गर्भावस्था में केवल शारीरिक परिवर्तन ही नहीं होते बल्कि मानसिक परिवर्तन भी होते हैं। शारीरिक रूप से खुद को स्वस्थ रखने के लिए खानपान से लेकर योग तक पर ध्यान देना जरुरी है। साथ ही समय पर जरुरी टीके लगवाना और जांच भी करना जरुरी होता है। गर्भावस्था में उचित खुराक, आराम, व्यायाम, चिकित्सकीय देखभाल, जांचों और जरूरत प़ड़ने पर कुछ दवाओं की जरूरत होती है। इन सभी पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है।


थायराइड की जांच

गर्भवती होने के लिए सबसे पहले अन्य जांच के साथ थायराइड की जांच करना भी जरुरी है। अगर थायराइड गड़बड़ होगा तो बच्चा होने की सम्भावना भी गड़बड़ हो जाती है। या बच्चा पेट में हो तो कई बार एबॉर्शन भी हो जाता है। ऐसे में हीमोग्लोबिन, आयरन, एचआइवी, थेलेसीमिया की जांच के साथ थायराइड की जांच भी उतनी ही जरुरी है।

मॉर्निंग सिकनेस

गर्भावस्था के प्रारंभिक तीन महीनों में कई महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस या जी मचलाने या मितली आने की शिकायत होती है। ऐसे में सुबह उठते ही पहले सूखा बिस्किट खा लें। थो़ड़ी बहुत चाय-कॉफी और हल्का खाना, फल, सलाद खाते रहें। डॉक्टर की सलाह पर उल्टी रोकने की दवा भी ली जा सकती है लेकिन वो तब ही जब ये समस्या काफी हो। परम्भिक तीन महीने में मां को ज्यादा कैलोरी वाली डाइट के साथ प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम व् फोलिक एसिड लेना चाहिए।

एनीमिया से बचना जरुरी

गर्भवती महिला में लौह तत्व की कमी से एनीमिया होना भी बहुत अधिक पाया जाता है। एनीमिया की कमी कैवल शिशु ही नहीं कई बार मान के लिए बही घातक हो जाती है। इसलिए शुरूआती दौर में ही एनीमिया की जांच के साथ आयरन और फ़ॉलिक एसिड की गोलियां लेना जरुरी है। खानपान से भी हीमोग्लोबिन का स्टार सही रखा जा सकता है। इसके लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, सलाद खाना आवश्यक है। आयरन की गोली के साथ विटामिन-सी के सेवन से आयरन का अच्छी तरह से अवशोषण होता है।रोज प्रचुर मात्रा में दूध, दही या मट्ठा होना चाहिए। कमी अधिक हो तो कैल्शियम की गोली भी लेना चाहिए।


डॉक्टर की सलाह

प्रिग्नेंसीय में डॉक्टर के टच में रहना बहुत जरुरी है। क्योंकि इस दौरान तमाम जांच और टीके लगवाना बहुत जरुरी होता है। साथ ही शिशु और यूट्रस की स्थिति के आधार पर ही इलाज या बचाव की सलाह डॉक्टर देते हैं। पूरे 9 महीने डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए क्योंकि डिलीवरी के समय कोई दिक्कत होने पर डॉक्टर को पूरी केस हिस्ट्री पता हो।

योग भी बनाता है प्रसव को आसान

यदि प्रशिक्षक की देखरेख में योग किया जय तो कुछ आसन गर्भावस्था में भी काफी अच्छे होते हैं। गर्भावस्था में खुद और शिशु की सही देखभाल के लिए कुछ आसन हैं । ये आसान सामान्य प्रसव के करने में भी सहायक होते हैं। लेकिन बिना किसी प्रशिक्षक के योग खतरनाक हो सकता है।

बहुत मीठा न खाएं

हाल ही में अमेरिका में हुए शोध में ये बात सामने आई है की यदि गर्भवस्था में माँ चीनी या मीठे पदार्थ ज्यादा कहती है तो उसके गर्भस्थ शिशु को एलर्जी या अस्थमा होने की सम्भावना बढ़ जाती है। शोध में पाया गया की 5 साल की उम्र तक आते आते एलर्जी और कुछ साल बाद अस्थमा के लक्षण उन बच्चों में ज्यादा दिखा जिनकी माँ ने गर्भावस्था में मीठा बहुत खाया था।