Poems

कविता : मां बाप के घावों पर मरहम हैं बेटियां

“बेटियां” सेवा हैं ,समर्पण हैं, उल्फत हैं बेटियां। मां- बाप पे भगवान की रहमत हैं बेटियां। बटवारे की इबादत बेटों ने जब...

error: Content is protected !!