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जेटली का बजट मोदी का घोषणा पत्र

गुरूवार को अरूण जेटली ने अपना आखिरी सबसे बड़ा बजट पेश किया. बजट में जेटली ने आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए लगभग सभी वर्ग के लोगों को लुभाने की कोशिश की है.जैसा कि राजनीतिक पंडित भी यह कयास लगा रहे थे कि सरकार इस बजट के बहाने अपना वोट बैंक साधने की कोशिश करेगी और परिणामत: हुआ भी वैसा ही.बजट के बाद मोदी ने तारीफ करते हुए अपनी आगामी रणनीति को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी.
जेटली ने अपने इस बजट में किसानों और ग्रामिणों को लुभाने की पूरी कोशिश की है. सरकार ने किसानों की खरीफ़ फसलों पर समर्थन मूल्य डेढ़ गुनी करने की बात कही है. साथ ही आलू प्याज टमाटर के लिए ऑपरेशन ग्रीन के तहत 500 करोड़ रुपए देने की बात कही है. वही सरकार ने इस बार किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ पशु पालकों को भी देने की बात कही है.साथ ही इस बजट में सरकार ने ग्रामिणों के लिए 2022 तक हर सर के ऊपर छत देने की बात कही है.
सरकार के इस बजट को देख कर साफ लग रहा है कि सरकार ने किसानों के प्रति सॉफ्ट टारगेट तैयार किया है.बता दें कि गुजरात चुनाव में जिस तरह से किसानों ने भाजपा को नकारा था, उससे कहीं न कहीं बीजेपी बैकफुट पर थी.इसके पहले पिछले साल एमपी में किसानों का जिस प्रकार से आंदोलन हुआ था.निश्चित रूप से वह बीजेपी के लिए आगामी चुनावों के मद्देनजर सेहतमंद नहीं था.इसीलिए इस बजट में जेटली ने किसानों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है.अभी कई राज्यों में चुनाव होने है.साथ ही आगामी लोक सभा चुनाव भी बहुत दूर नहीं है.सरकार किसानों के वोट बैंक के महत्व को समझती है.इसीलिए वह इनके वोट बैंक पर सेंधमारी कर रही है.
इतना हीं नहीं सरकार ने विशेष रणनीति के तहत हर उस वर्ग को टारगेट किया है जिसका चुनावी अंकगणित में बड़ा रोल होता है.सरकार ने हेल्थ सेक्टर और बुजुर्गों के लिए भी कई लोक लुभावने वादे किए है.इसके साथ ही महिलाओं को भी सरकार ने वोट बैंक के रूप में साधने की कोशिश की है.उज्जवला योजना के तहत निशुल्क रसोई गैस कनेक्शन योजना का लाभ अब 5 करोड़ से बढ़ाकर 8 करोड़ गरीब महिलाओं को देने की बात कही गयी है. ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए बजट में मछली व पशुपालन पर खास जोर दिया गया है. इसके लिए 10 हजार करोड़ रुपये का फंड बनाने की बात कही गयी है. कुल मिलाकर सरकार ने एक खास रणनीति के तहत सॉफ्ट वर्ग को साधने की कोशिश तो की है लेकिन एक बार फिर से मध्यम वर्ग को निराशा ही हाथ लगी है.सरकार ने राहत देनें के नाम पर मुश्किलें बढ़ा ही दी है.उम्मीद थी कि टैक्स पेयर्स को राहत मिलेगी पर उल्टे राहत के नाम पर 1 प्रतिशस सेस बढ़ा ही दिया.
हालांकि जेटली सरकार कोई पहली बार नहीं लुभा रही है.हर साल बजट में लुभाने की कोशिश होती ही है.पिछले साल भी सरकार ने किसान खेती, युवा, महिला सबके लिए कई वादें की थी पर अभी तक उन वादों को क्रियान्वित नहीं कर पायी है.ऐसे में सरकार के इस बजट पर सवाल खड़े होने लगे है.सरकार के पास लगभग एक साल का समय शेष और यकिनन ये वादें एक साल में पूरे होने वाले नहीं है.ऐसे में इतना तो साफ है कि जेटली ने बजट के बहाने बीजेपी का घोषणा पत्र पेश किया है.

इन्द्रभूषण मिश्न । 

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बजट पर विपक्ष बेरहम , आप ने बजट को कहा पकौड़ा

गुरूवार को वित मंत्री अरूण जेटली ने लोकसभा में अपना आखिरी सबसे बड़ा बजट पेश किया.बजट पेश होने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गयी.जहां एक तरफ कुछ लोग बजट की तारीफ कर रहे है वही दूसरी तरफ विपक्ष बजट पर सवाल भी खड़े कर रहा है.

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा लोकसभा में पेश किये गये बजट पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रहार किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि 4 साल बीत गये, लेकिन किसानों को आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला. 4 साल बीत गये युवाओं को रोजगार नहीं मिला.शुक्र है अब सिर्फ एक साल बचे हैं.

वही आप ने बजट को पकौड़ा बजट कहा है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि केंद्र दिल्ली के साथ ‘‘सौतेला व्यवहार जारी रखे हुए है. केजरीवाल ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में महत्वपूर्ण ढांचागत विकास के लिए कुछ वित्तीय सहायता की उन्हें उम्मीद थी. केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘‘मैं देश की राजधानी में ढांचागत विकास के लिए कुछ वित्तीय सहायता की उम्मीद कर रहा था. मुझे निराशा है कि केंद्र का दिल्ली के साथ सौतेला व्यवहार जारी है.

वही पूर्व वित मंत्री पू चिदंबरम ने पलटवार करते हुए कहा कि इस बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली राजकोषीय मजबूती की परीक्षा में फेल हुए हैं और इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे. उन्होंने कहा कि 2017-18 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.2% पर रखा गया था लेकिन इसके 3.5% पर पहुंचने का अनुमान है.