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संघ मना रहा है 93 वां स्थापना दिवस : मोहन भागवत के संबोधन की बड़ी बातें


माय टाइम्स टुडे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आज अपना स्थापना दिवस मना रहा है. आज ही के दिन संघ के पहले संघचालक डॉ हेडगेवार ने 1925 में संघ की नीवं रखी थी। महज पांच स्वयंसेवकों से शुरू हुआ यह संगठन आज दुनिया का सबसे बड़ा संगठन है. शनिवार को नागपुर संघ मुख्यालय में स्थापना दिवस पर सर संघचालक मोहन भागवत ने राष्ट्र को संबोधित किया. रोहिंग्या से लेकर काश्मीरी पंडितों पर उन्होंने अपने विचार रखे. आईए जानते है संघ प्रमुख ने और क्या कहा..

मोहन भागवत के भाषण की बड़ी बातें…

 कश्मीरी पंडित अपने ही देश में विस्थापित हो गए हैं. वहां के हालात में सुधार के लिए अगर कानून में बदलाव करना पड़े तो हमें यह कदम भी उठाना चाहिए. कश्मीर समस्या का समाधान जल्द हो सकता है. पाकिस्तान की वजह से जम्मू-कश्मीर में रहने वाले लोग परेशान हैं.

केरल और पश्चिम बंगाल में राष्ट्रविरोधी और जेहादी ताकतें सिर उठा रही हैं. वोटबैंक के लिए राज्य सरकारें इन्हें रोकने में उदासीन हैं. या कभी कभी तो इनका रवैया ऐसा होता है जैसे वे इनकी मदद कर रहे हों.

सीमा की समस्या कम नहीं है, सब प्रकार की तस्करी, विशेषकर गौ तस्करी, बांग्लादेश की सीमा पर चलती है.
पड़ोसी देशों के बीच हमारी पहचान नेता के रूप में बन रही है.

बांग्लादेश से आए लोगों की समस्या हल भी नहीं हो पाई है कि म्यांमार से भगाए गए रोहिंग्या अब एक नई समस्या बनकर आ गए हैं. रोहिंग्या मुसलमानों को आतंकियों से संबंध है. इन्हें देश में शरण देने से सुरक्षा संकट पैदा होगा. रोहिंग्या पर केंद्र सरकार का रुख सही है.
सीमा पर चुनौती देने वालों को हमने जवाब दिया है.

डोकलाम में हमने अपने गौरव की रक्षा की है. सीमा पर कुराफाती करने वालों को हमने सीमा पर जवाब दिया है.
ऐसा लग रहा है कि देश के विकास की गति थोड़ी मंद पड़ी है, लेकिन ऐसा लगता है कि इसमें सुधार होगा.

हमें अंग्रेजी मानसिकता को दिमाग से हटाना है. समाज का अपना भूमि से जुड़ाव जरूरी है. पहले राष्ट्र एक राजा अनेक थे. राष्ट्र प्रगति करती है तो दुनिया उससे जुड़ती है.
मुंबई रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवार वालों के साथ मेरी गहरी संवेदना है.
भारत को आजाद हुए 70 साल हो गए हैं, लेकिन पहली बार दुनिया को लग रहा है कि भारत थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ रहा है. अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की साख और पहचान बनी है.