Posted in News

कौन है सायरा बानो : क्यों हो रही है तीन तलाक पर इनकी चर्चा ?

MY TIMES TODAY. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक निर्णय में तीन तलाक को असवैंधानिक घोषित करते हुए सरकार को 6 महिने के अंदर इस पर कानून बनाने की बात कहा है। कोर्ट के इस फैसले को लेकर देशभर में लोगों ने अपनी – अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ लोग खुलकर कोर्ट के निर्णय के प्रति खुशी जाहिर कर रहे हैं तो कुछ लोगों की हताशा को भी साफ तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन इन सब के बीच सायरा बानो नाम की एक महिला विशेष तौर पर सुर्खियां बटोर रही है। कोर्ट के फैसले के बाद तमाम न्यूज़ चैनल, वेेब मीडिया और सोशल मीडिया पर सायरा बानो की खूब चर्चा हो रही हैैै । आईए जानते है कि कौन है सायरा बानों और क्यों हो रही है इनकी चर्चा …

इंदौर की रहने वाली मुस्लिम महिला शाहबानो को उसके पति मोहम्मद खान ने 1978 में तलाक दे दिया था। पांच बच्चों की मां 62 वर्षीय शाहबानो ने गुजारा भत्ता पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी और पति के खिलाफ गुजारे भत्ते का केस जीत भी लिया। सुप्रीम कोर्ट में केस जीतने के बाद भी शाहबानो को पति से हर्जाना नहीं मिल सका। देश भर के मुस्लिम संगठनों ने कोर्ट के फैसले को पर्सनल लॉ में दखल बताते हुए इसका जमकर विरोध किया। इसको लेकर आंदोलन की धमकी दी गई। तत्कालीन राजीव गांधी की सरकार ने उनकी मांग मान ली और तब एक कानून बनाया गया। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया गया। 1986 में राजीव गांधी की सरकार ने मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 1986 पारित किया। इस अधिनियम के तहत शाहबानो को तलाक देने वाला पति मोहम्मद गुजारा भत्ता के दायित्व से मुक्त हो गया था।

एक उत्तराखंड की शायरा बानो भी तीन तलाक की शिकार : एक समाचार पत्र द्वारा  लिए गए शायरा बानो के साक्षात्कार के कुछ अंश ….

2015 की बात है। काशीपुर उत्तराखंड में रहने के दौरान मेरे पति ने मुझे स्पीड पोस्ट से तलाक भेजा। मेरे दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। मुझ पर तो जैसे मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा। मैनें खुद को परिवारवालों की मदद से संभाला। पहले तो कुछ समझ नहीं आया लेकिन बाद में मैंने लड़ाई करने की ठानी। इस संघर्ष में मुझे काफी लोगों का सहयोग मिला। इस कानूनी लड़ाई में मेरे भाई अरशद ने काफी साथ दिया। वह मुझे दिल्ली लेकर आया और यहां आकर मैं सुप्रीम कोर्ट में वकील बालाजी श्रीनिवासन से मिली। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह मुझे कानूनी सहायता देंगे। वकील साहब की मदद से याचिका तैयार की गई। फिर मैंने तीन तलाक के खिलाफ अर्जी दाखिल कर उसे गैर संवैधानिक घोषित करने और उसे निरस्त करने की गुहार लगाई। मुझे पूरा भरोसा था कि मुझे न्याय मिलेगा और फिर सुप्रीम कोर्ट के जजों ने आज एक ऐतिहासिक फैसला दिया है।