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क्या है चारा घोटाले की कहानी : परत दर परत पढ़िए

माय टाइम्स टुडे। चारा घोटाला बिहार के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला है.नब्बे के दशक में इस घोटाले ने बिहार ही नहीं बल्कि देश के राजनीतिक दांव पेच को उलट पलट कर रख दिया था. घोटाले की पुष्टि होने के बाद रातों रात बिहार में सियासी उथल पुथल मच गया.आनन फानन में राबड़ी देवी को बिहार की कमान दे दी गयी. आईए आज हम समझने की कोशिश करते है कि आखिर चारा घोटाला में कब क्या बदला और किस तरह नए नए समीकरण बनते बिगड़ते गए.

बिहार पुलिस ने 1994 में राज्य के गुमला, रांची, पटना, डोरंडा और लोहरदगा जैसे कई कोषागारों से फर्ज़ी बिलों के ज़रिए करोड़ों रुपए की कथित अवैध निकासी के मामले दर्ज किए.रातों-रात सरकारी कोषागार और पशुपालन विभाग के कई सौ कर्मचारी गिरफ़्तार कर लिए गए, कई ठेकेदारों और सप्लायरों को हिरासत में लिया गया और राज्य भर में दर्जन भर आपराधिक मुक़दमे दर्ज किए गए.सीबीआई ने मामले की जांच की कमान संयुक्त निदेशक यूएन  विश्वास को सौंपी गयी.

सीबीआई के कमान संभालते ही बड़े पैमाने पर गिरफ़्तारियां हुईं और छापे मारे गए. लालू प्रसाद यादव के ख़िलाफ़ सीबीआई ने आरोप पत्र दाख़िल कर दिया जिसके बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा और बाद में सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिलने तक वे कई महीनों तक जेल में रहे.

साल 1996 में सामने आया चारा घोटाला पिछले करीब 20 साल से जारी था.इसमें जानवरों के लिए चारा, दवाएं और पशुपालन से जुड़े उपकरणों को लेकर घोटाले को अंजाम दिया गया। इसमें नौकरशाहों, नेताओं और इस बिजनेस से जुड़े लोग भी शामिल थे.जांच के दौरान सीबीआई ने बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के इस घोटाले के संबंधों का खुलासा किया.इसके बाद 10 मई 1997 को सीबीआई ने बिहार के राज्यपाल से लालू के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. इसी दिन इस मामले से जुड़े बिजनेसमैन हरीश खंडेलवाल एक रेल पटरी पर मृत पाए गए.

राज्यपाल की अनुमति मिलते ही 17 जून 1997 को सीबीआई ने बिहार सरकार के पांच बड़े अधिकारियों को हिरासत में ले लिया.इनमें महेश प्रसाद, के. अरुमुगम, बेक जुलियस, फूलचंद सिंह और रामराज राम के नाम शामिल हैं. 23 जून 1997 को सीबीआई ने लालू यादव और 55 अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की.इसमें पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा और पूर्व केंद्रीय मंत्री चंद्रदेव प्रसाद वर्मा भी थे. जगन्नाथ मिश्रा को अग्रिम जमानत मिल गई, लेकिन लालू की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो गई.

 

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मुश्किल में लालू :अपने विधायको साथ बैठकर थोड़ा ग़म हल्का करेंगे

MY TIMES TODAY.  बिहार में इन दिनों सियासत तेज हो गई है। लालू के परिवार पर छापे पड़ने के बाद से बिहार में सियासत की गरमाहट बढ़ गयी है।एक तरफ जहां बिहार में आसमान से बिजली आफत बनकर सामने आई है, वही बेचारे लालू भी चौतरफा औंधे मुह गिर गए है। साख तो वैसे भी कभी लालू की रही नही, चारा घोटाले के बाद तो रजिस्टर्ड हो गए। आज जब पूरा परिवार घोटालों के महाजाल में फंसा है तब लालू के हाव भाव भी बदल गए है। लालू को महागठबंधन के टुटने का डर भी सताने लगा है। जिसको देखते हुए आरजेडी ने सोमवार को अपने सभी विधायकों की बैठक बुलाई है। तो ठीक एक दिन बाद नीतीश भी अपने विधायकों और सांसदों के साथ बैठक करने वाले हैं। दरअसल तेजस्वी पर लगे आरोपों के बीच बीजेपी लगातार उनके इस्तीफ़े की मांग कर रही है, जबकि नीतीश इस मुद्दे पर अब तक चुप्पी साधे हुए हैं।वहीं, एक दिन पहले सीबीआई छापेमारी से परेशान राजद प्रमुख लालू प्रसाद के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए बिहार की महागठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस के नेताओं ने लालू यादव के आवास जाकर उनसे मुलाकात की थी. राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी दलों की साझा उम्मीदवार मीरा कुमार को पड़ोसी राज्य झारखंड रवाना करने के बाद बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी और बिहार विधानसभा में पार्टी विधायक दल के नेता सदानंद सिंह ने दस सकुर्लर रोड स्थित लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी के आवास जाकर लालू से मुलाकात की थी. कांग्रेस के इन नेताओं के साथ तत्कालीन बिहार सरकार में कांग्रेस से मंत्री रहे अवधेश कुमार सिंह और मदन मोहन झा भी उपस्थित थे।