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तेरा होके तेरे सपनों मे मगरुर हो जाता..

MY TIMES TODAY. 

रात के अंधेरे मे अक्सर तेरी बातेँ याद आती हैँ,
पलकेँ भीँग जाती हैँ जब तु हौले हौले मुस्कुराती हैँ,
याद आते हैँ वो लम्हे जो साथ बिताए थे,
निहारिका के बाहर जो गोलगप्पे खाये थे,
जुबली पार्क की वो शाम कितनी सुहानी थी,
जब मेरी बाहोँ मे लिपटी मेरी दिवानी थी,
बस का वो सफर भी कितना मस्ताना था,
तेरेँ आंचल मे लिपट के जो जाना था,
कौफी हाउस के डोसे डामिनोज के पिज्जे,
बहुप याद आते हैँ तेरे होठोँ के किस्सेँ,
काश मैँ वही होता फिर चित्रा मे चित्रहार सजाते,
तेरी सेल्फी मेरी सेल्फी लिपट के खिँचाते,
यूँ आते जाते तुमसे दुर ना जाता,
तेरा होके तेरे सपनोँ मे मगरुर हो जाता…

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