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युवाओं का लेफ्टविंग हो न राइटविंग, केवल हो इंडिया विंग : विवेक अग्निहोत्री

भोपाल, 12 अगस्त। सामाजिक संवाद की गुणवत्ता बढ़ाने में सोशल मीडिया की भूमिका विषय पर युवाओं के साथ चर्चा में फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि युवाओं का कोई लेफ्टविंग या राइटविंग नहीं होना चाहिए, उनके लिए सिर्फ इंडिया विंग होना चाहिए। यंग थिंकर्स फोरम और राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव में युवा प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए श्री अग्निहोत्री ने कहा कि युवाओं को देश के लिए विचार करना चाहिए। सोशल मीडिया की भूमिका पर चर्चा करने के लिए राजनीतिक विश्लेषक एवं लेखक शुभ्रास्था, प्रज्ञता के संस्थापक आशीष धर और ओप इंडिया के संस्थापक राहुल रौशन भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

            राजनीतिक विश्लेषक शुभ्रास्था ने युवाओं से चर्चा में कहा कि आपके विचारों पर यदि कोई आपको किसी एक विचारधारा से बाँधना चाहता है, तब परेशान होने की जरूरत नहीं। उसे ऐसा करने दीजिए, लेकिन आप अपनी परिभाषा स्वयं लिखें। उन्होंने बताया कि आज की स्थिति में यदि मैंने भगवा चुनरी ओढ़ रखी हो तो मेरी हर बात को संघ से जोड़ा जाएगा और भगवा रंग को लक्षित किया जाएगा। किंतु यही बात यदि कोई कम्युनिस्ट बोलेगा तो उसे विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहा जाएगा। उन्होंने कहा कि संवाद में संयम और सौहार्द होना चाहिए। जब आप किसी गंभीर विषय पर लिख-बोल रहे हैं, तो वहाँ पर अपशब्दों को उपयोग आपके चरित्र और विचार की कमजोरी को दर्शाते हैं। लोकतंत्र में आपको सब प्रकार की स्वतंत्रता है, किंतु सीमा पर खड़े जवान को गाली नहीं दे सकते।

देश में तीन तरह के लोग : थिंक टैंक प्रज्ञाता के संस्थापक आशीष धर ने बताया कि देश में तीन तरह के लोग होते हैं। एक,जो देश पर गर्व करते हैं। दो, जो देश के विरुद्ध होते हैं। तीसरे, जो किसी के साथ नहीं होते। इस वर्ग को इस बात की कतई चिंता नहीं होती कि देश किस दिशा में जा रहा है। यह सिर्फ रोज सुबह उठते हैं, खाना खाते हैं, नौकरी पर जाते हैं और लौटकर टीवी देखते हैं, सो जाते हैं। किंतु, यह देश के मतदाता हैं। पाँच साल में एक बार अपने मताधिकार का उपयोग करते हैं। इसलिए लिए यह वर्ग हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इन्हें मुख्यधारा से जोडऩा आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संवाद में व्यंग्य अपने विचार को अभिव्यक्त करने का सबसे सशक्त औजार है। इससे आप किसी का नाम लिए बिना ही आप अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं।

मीडिया पर निगरानी रखने की जरूरत :

मीडिया की भूमिका पर अपनी बात रखते हुए राहुल रौशन ने कहा कि मीडिया समाज में वॉचडॉग की भूमिका जरूर निभाता है, लेकिन आज उसकी भी निगरानी करने की जरूरत है। मीडिया को निर्णायक नहीं माना जाना चाहिए। युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यधारा के मीडिया पर नजर रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर आप अपनी बात कहें, उसके बाद लोग क्या कहते हैं, उससे आप अपनी सोच को प्रभावित न होने दें।

अतीत को कोसे नहीं, उससे सीखें :

‘सामाजिक समावेश और सांस्कृतिक अखण्डता’ विषय पर चर्चा में थिंक टैंक इंडिक कलेक्टिव के संस्थापक साई जे. दीपक ने कहा कि हमें अपने अतीत को कोसना नहीं चाहिए बल्कि उससे कुछ सीखना होगा। जब तक हम अपने अतीत से अच्छी चीजें नहीं सीखेंगे, तब तक हमारा आगे बढ़ाना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि भारत हमारा ऐसा देश है, जहां प्रत्येक 10 किमी में भाषा और संस्कृति बदल जाती है। यह गर्व की बात है कि भाषा और संस्कृति की विविधता के बाद भी हम सब एक हैं। जबकि ब्रिटेन जैसे देशों में जहाँ एक ही धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं,वह विखंडित हो गए। इस सत्र की अध्यक्षता कर रहे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि देश में बौद्धिक आतंकवाद आ गया है। इस बौद्धिक आतंकवाद को लाने वाले लोग वही हैं, जो लोकतंत्र के हिमायती हैं। उन्होंने कहा कि आज हमारे देश के दुश्मन सिर्फ आम आतंकी नहीं हैं, बल्कि बौद्धिक आतंकी भी हैं। युवाओं की लड़ाई ऐसे ही लोगों से है। अपनी संस्कृति का संरक्षण करने के लिए उन्होंने युवाओं का आह्वान किया। वहीं, देश की आतंरिक सुरक्षा विषय पर यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव में आए युवाओं को संबोधित करते हुए आंतरिक सुरक्षा विशेषज्ञ आरवीएस मणि ने कहा कि देश की सुरक्षा प्रत्येक नागरिक के लिए सबसे पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय सीमा पर सुरक्षा में लगे सैनिक हम सभी के लिए देव तुल्य हैं।

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इन विषयों पर भी हुआ विमर्श :

यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव में दूसरे दिन विभिन्न समानांतर सत्र आयोजित हुए, इन सत्रों में प्रमुख रूप से प्रतिभागी युवाओं ने अपने विचार रखे। सेवा, समाज सुधार, महिला नेतृत्व, बौद्धिक नेतृत्व, उद्योग एवं व्यापार और शैक्षणिक परिसर में युवाओं की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया। इन विषयों पर चर्चा करने के लिए अमिताभ सोनी, आलोक दुबे, कविता पाटीदार, अनुराग नागाइच, आशीष अग्रवाल और रितेश गोयल उपस्थित थे। इसके साथ ही प्रमुख थिंक टैंक के प्रतिनिधियों ने भी युवाओं के साथ चर्चा की। इनमें प्रज्ञाता के आशीष धर, सृजन फाउंडेशन से राहुल दीवान, इंडिया फाउंडेशन से रजत सेठी, निमित्तकम से ओमेन्द्र रत्नु, इंडिया इंस्पायर से हर्षित जैन और गरुड प्रकाशन से अंकुर जैन प्रमुख थे।

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जिसे इतिहास का ज्ञान नहीं वो भारत का निर्माण नहीं कर सकता- राकेश सिन्हा

एमटीटी भोपाल। भोपाल में आयोजित यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता एवं विचारक प्रो. राकेश सिन्हा ने कहा कि जब व्यक्ति का वर्तमान कमजोर होता है तो वह अपनी विरासत में अपनी छवि देखता है और अपनी कमजोरी को विरासत की समृद्धि में छिपा लेता है। हमारे वेद-उपनिषद में क्या कहा गया है, यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि हम आज क्या कह रहे हैं। उन्होंने बताया कि हमें अपने भविष्य को बनाने के लिए अपने इतिहास का अध्ययन करना चाहिए।

प्रो. सिन्हा ने इतिहास के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इतिहास विस्मृत करने के लिए नहीं है, स्मृति के लिए होता है। अब तक ऐसा इतिहास पढ़ाया गया, जो हमें विस्मृति देता है। भारत के विभाजन की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश को सिर्फ 1947 में नहीं बाँटा गया,बल्कि भारत उसके पहले और बाद में भी विभाजित हुआ है।1962 में हमने अपनी जमीन खोई। 1937 में बर्मा भारत से अलग हुआ। उन्होंने बताया कि हमारे इतिहास में यह जिक्र नहीं है कि बर्मा किस प्रकार भारत से अलग हुआ। बर्मा को अलग करने के लिए जब जनमत कराया गया, तब 51 प्रतिशत से अधिक लोगों ने कहा था कि वह भारत के साथ रहना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास को योजनापूर्वक धूल-धूसरित कर दिया गया है। जिस भारतीय को अपने इतिहास का सही ज्ञान नहीं है, वह भारत का निर्माण नहीं कर सकता। राष्ट्र को जानने के लिए सबसे पहले प्रत्येक भारतीय को यह जानना होगा कि वह कौन है? प्रो. सिन्हा ने महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए बताया कि गांधीजी ने कहा था कि अंग्रेजी की किताबों का अनुवाद करने वाले कभी भी भारत का निर्माण नहीं कर सकते। हमें अपनी ज्ञान-परंपरा में उपलब्ध शास्त्र पढऩे होंगे और नये शास्त्र रचने होंगे।

नये और मौलिक विचार प्राप्त करना चाहता है युवा :

प्रो. सिन्हा ने कहा कि भारत का युवा नये और मौलिक विचार को प्राप्त करना चाहता है। उन्होंने कहा कि न थकने वाला और न हारने वाला युवा ही भारत को आगे बढ़ा सकता है। भारतीयता के संबंध में उन्होंने कहा कि भारत में जो भोग के उद्देश्य से आए,उन्होंने कभी इस देश को अपना नहीं माना। भारत ने भी उन्हें कभी स्वीकार नहीं किया। जो भारतीय बनकर आएगा, उसे हम स्वीकार करेंगे और जो अभारतीय बनकर आएगा, उसे बाहर कर देंगे। उन्होंने बताया कि भारत में ‘संगम’ का बहुत महत्व है। हम माँ गंगा या नर्मदा में स्नान से जो पुण्य मिलता है, उससे भी अधिक महत्व ‘संगम’ में स्नान का है। हमें ऐसे भारत का निर्माण करना है, जिसमें सामाजिक न्याय हो, समरसता और समानता हो।

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युवाओं ने की थिंक टैंक के प्रतिनिधियों से चर्चा :

यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव में पहले दिन विभिन्न थिंक टैंक के प्रतिनिधियों के साथ युवा प्रतिभागियों ने चर्चा की। सीआईएस के पंकज सक्सेना, इंडिया फैक्ट के नितिन श्रीधर और स्वराजमार्ग के अरिहंत पावरिया ने युवाओं को विभिन्न विषयों पर परामर्श दिया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांध समां :

कॉन्क्लेव में युवा प्रतिभाओं ने अपनी कला का प्रदर्शन भी किया। गीत-संगीत, नृत्य और अन्य विधाओं में अपनी प्रस्तुति से युवाओं ने सबका मन मोह लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में देश की सांस्कृतिक विविधता की झलक दिखाई दी।

कल इन विषयों पर होगी चर्चा :

12 अगस्त को बौद्धिक सत्र प्रात: 9 बजे से प्रारंभ हो जाएंगे। दूसरे दिन साई दीपक, आरवीएस मणि, राहुल रौशन, शुभ्रास्था,आलोक दुबे, कविता पाटीदार, अनुग्रह नागायिच और आशीष अग्रवाल सहित अन्य विद्वान युवाओं के साथ चर्चा करेंगे। सेवा,सामाजिक सुधार, महिला नेतृत्व, बौद्धिक नेतृत्व, उद्योग एवं व्यापार में युवाओं की भूमिका पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके साथ ही इस बात पर भी चर्चा होगी कि सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक विमर्श की गुणवत्ता को कैसे सुधारा जा सकता है। वहीं, दूसरे दिन प्रज्ञाता, सृजन फांउडेशन, इंडिया फांउडेशन, इंडिक कलेक्टिव, ओपी इंडिया, निमित्तेकम, इंडिया इंस्पायर, गरुड प्रकाशन और प्रज्ञा प्रवाह के प्रतिनिधि क्रमश: आशीष धर, राहुल दीवान, रजत सेठी, साई दीपक, राहुल रौशन,ओमेन्द्र रत्नु, हर्षित जैन, अंकुर और श्रीकांत काटदरे उपस्थित रहेंगे। दो दिवसीय यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव का समापन 12 अगस्त को शाम 5:15 बजे होगा। समापन सत्र के मुख्य वक्ता प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार होंगे।

इस मौके पर कार्यक्रम की अध्यक्ष राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, प्रख्यात लेखक अरविन्दन नीलकंदन,प्रख्यात लेखक संक्रांत सानु ,माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के कुलपति जगदीश उपासने,  सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता मोनिका अरोरा आदि गणमान्य हस्तियां उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन अपूर्वा मुक्तिबोध ने किया और धन्यवाद ज्ञापन कॉन्क्लेव के संयोजक डॉ. संजीव शर्मा ने किया।