कविता – मेरे पापा

तबीयत ठीक है मेरी”, इस झूठ को एक पल में पकड़ लेते हैं। सलीके से बोली गई बात को पापा ना जाने कैसे पढ़ लेते है। दवाएं खीज जाती हैं, आपकी दुआओं का असर देखकर। सर पर हाथ आपका है,तो हम मौतों से भी लड़ जाते हैं। आपके कंधों की सैर हवा। के जहाजों में नहीं मिल पाती है। मेरी तुच्छ सी कारीगरी से, आंखे आपकी नम हो जाती है। नही स्वर्ग की आशा मुझको, आशीष आपका जन्नतों की पाती है। चरणों में हे ईश पिता, ये बेटी शत शत…

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