Posted in News

पत्रकारिता विश्वविद्यालय में हुआ वरिष्ठ साहित्यकार डॉ देवेंद्र दीपक की पुस्तक ‘गौ -उवाच’ का विमोचन


माय टाइम्स टुडे। जाने माने लेखक, कवि और साहित्यकार डॉ देवेंद्र दीपक की पुस्तक ‘गौ-उवाच‘ का लोकार्पण गुरूवार को नगर के माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय में किया गया। वर्तमान समय में गायों की स्थिति पर लिखी इस पुस्तक का लोकार्पण जगद्गुरू रामानंद स्वामी रामनरेशाचार्य जी के सानिध्य में किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री स्वामी जी ने कहा कि गाय हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। देश में गायों का संरक्षण होना चाहिए। आगे श्री स्वामी जी ने कहा कि गाय के लिए जनता को स्वयं आगे आना होगा, साथ ही संत समाज को भी गायों की रक्षा के लिए तत्पर रहना होगा। स्वामी जी ने जोर देते हुए कहा कि गौ रक्षा के नाम पर, गौशाला के नाम पर स्वयं का आश्रम बनाना बंद होना चाहिए। स्वामी जी ने मीडिया और उसके धर्म विषय पर बोलते हुए कहा कि पत्रकारों को भी गाय की महिमा के बारे में लिखना चाहिए। समाज को शिक्षित करना चाहिए। वर्तमान समय की पत्रकारिता पर कटाक्ष करते हुए स्वामी जी ने कहा कि लोभ और स्वार्थवश तथ्यों से परे होकर समाचार लिखना सही नहीं है। मीडिया में भी अध्ययन और गहन चिंतन की आवश्यकता है।

महात्मा गांधी ने भी कहा था कि आजादी से ज्यादा जरूरी है कि गायों को बूचड़खानों में जाने से रोका जाए, पर गाधी जी को मानने वाली कांग्रेस सरकार इस विषय से भटक गयी। 

डॉ दीपक की पुस्तक ‘गौ- उवाच‘ की समीक्षा के रूप में कुछ साहित्यकारों ने अपने पक्ष रखें आईए जानते है किसने क्या कहा :

मनीष गुप्ता : इंद्रा पब्लिकेशन प्रमुख मनीष गुप्ता ने कहा कि इस पुस्तक को पढ़ने के बाद लोगों के मन की विकृतियां बदल जाएगी। आज समाज में जिसप्रकार से गौ हत्या जैसे जघन्य अपराध हो रहे हैं, वो कम हो जाएंगे।

डॉ उदय प्रताप : डॉ प्रताप ने पुस्तक पर बोलते हुए कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से गाय ने अपनी वेदना स्वयं बताई है कि वर्तमान समय में समाज किस तरह से गाय के साथ व्यवहार कर रहा है। उन्होंने राजा दीलीप को उल्लेखित करते हुए कहा कि हमारे देश में आदिकाल से गौ सेवा की परंपरा रही है। इस पुस्तक की एक कविता ‘ पांच दिन पांच रात गाय की आंखों से बात’ के मार्मिक भावों सुनाते हुए बताया कि गाय किस प्रकार से अपनी करूणा को बयां करती है।

डॉ प्रेम भारती : डॉ भारती ने कहा कि गौ- उवाच एक सार्थक अनुत्तर संवाद है जिसमें जनता की अदालत में गाय अपना पक्ष स्वयं रखती है। उन्होंने कहा कि गायों को कसाईयों के हाथों बेचने के बजाय गौशाला में दे देना चाहिए।

श्री लक्ष्मीनारायण पयोधि: श्री पयोधि जी ने कहा कि गाय हमेशा से आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से पूज्य रही हैं।

डॉ विनय राजाराम: प्रसिद्ध लेखिका डॉ राजाराम ने कहा कि हम गाय को कामधेनू के रूप में जानते हैं। हमारे सामाज के सबसे महत्वपूर्ण रत्नों में से एक गाय भी है। रघुवंश की वंश परंपरा को चलाने के लिए राजा दीलीप ने गौ सेवा की थी।

डॉ कृष्ण गोपाल मिश्र: श्री मिश्र ने कहा कि गाय को पशु के रूप में न देख कर संस्कृति के रूप मे देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्यकाल के नरहरि के दायित्व बोध को वर्तमान में डॉ दीपक जी अपनी इस पुस्तक के माध्यम से कर रहे है। साथ ही श्री मिश्र ने कहा कि सरकार को गाय को लेकर सार्थक कानून बनाने की जरूरत है।

डॉ मयंक चतुर्वेदी : डॉ चतुर्वेदी ने कहा कि बेरोजगारी के युग में गाय रोजगार के साधन के रूप में बेहतर विकल्प है। यह पुस्तक लोगों को गौ सेवा के लिए प्रेरित करती है।

डॉ लाजपत आहूजा : विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव डॉ आहुजा ने कहा कि यह विश्वविद्यालय गौ सेवा के लिए समर्पित है। मीडिया के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि जहां विश्व में समाचार प्रकाशन बंद होने के कागार पर है वही भारत में इसकी व्यापकता बढ़ती जा रही है।

इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव लाजपत आहूजा, कुलसचिव संजय द्विवेदी,  वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रेम भारती, डॉ. कृष्ण गोपाल मिश्र, लक्ष्मीनारायण पयोधि, डॉ. विनय राजाराम,डॉ. मयंक चतुर्वेदी, डॉ. उदय प्रताप, घनश्याम मैथिल और इंद्रा पब्लिकेशन प्रमुख मनीष गुप्ता सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक और छात्रगण मौजुद रहे।श्रीमती ऊषा मेहता ने स्वामीजी को स्मृति चिह्न भेंट किया वही कार्यक्रम का संचालन डॉ. साधना बलवटे ने किया।

इस मौके पर लेखक डॉ देवेंद्र दीपक ने देहदान का संकल्प लिया। 

पुस्तक : गौ -उवाच, इंद्रा पब्लिकेशन,  किमत 80 रूपए ।