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जात से लेकर जगजीवन तक ‘ कौन है मीरा कुमार ‘

मॉय टाइम्स टुडे । आज हम आपको विपक्ष की राष्ट्रपति उम्मीदवार मीरा कुमार के बारे में कुछ बता रहें है । वैसे भी सोशल मीडिया पर लोग सवाल पुछ रहे हैं कि मीरा कुमार के पति शास्त्री हैं तो वह दलित कैसे हुई। पर सच यहीं है कि वजह चाहे जो भी हो लेकिन शास्त्री जी की पत्नी दलित ही है। हां इनके दोनों बच्चे शास्त्री हैं वो भी अपने नाम से टाईटल गायब कर लिए है। इनके पति मंजुल कुमार भी अपने नाम में शास्त्री नहीं लगाते है। खैर छोड़िये ये सब बाते हैं बातों का क्या, दलित- वलित कुछ नहीं है सब मोह माया है। हमारे संविधान में भी दलित शब्द का जिक्र नहीं है। ये शब्द तो नेताओं और मीडिया का अपने मतलब के लिए प्रायोजित रखैल है। खैर छोड़िये इन मोल जोल बातों को, असली विषय पर आते हैं।

तकलिफ इस बात की नहीं है कि मीरा कुमार दलित है, तकलिफ ये भी नहीं है कि कोई दलित राष्ट्रपति बन रहा है। दरसल तकलिफ इस बात की है कि अब राष्ट्रपति भी दलित हो गया ।

मीरा कुमार भूतपूर्व रक्षा मंत्री जगजीवन राम की बेटी हैं. वो विदेश सेवा की अधिकारी भी रह चुकी हैं. बिहार के सासाराम से जीतने वाली मीरा कुमार 15वीं लोकसभा की अध्यक्ष रह चुकी हैं. उन्हें देश की पहली महिला स्पीकर होने का गौरव हासिल है.

मीरा कॉन्वेन्ट एडुकेटेड हैं. उनकी शिक्षा देहरादून, जयपुर और दिल्ली में हुई है. उन्होंने दिल्ली के इंद्रप्रस्थ कॉलेज और मिरांडा हाउस से एमए और एलएलबी किया है.

 1970 में वह भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के लिए चुनी गईं. इसके बाद स्पेन, ब्रिटेन और मॉरीशस में उच्चायुक्त रहीं लेकिन अफसरशाही उन्हें रास नहीं आई और उन्होंने राजनीति में कदम बढ़ाने का फैसला किया.

उत्तर प्रदेश से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाली मीरा कुमार ने 1985 में बिजनौर लोकसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव में मायावती और रामविलास पासवान को पराजित कर पहली बार संसद में कदम रखा. हालांकि इसके बाद हुए चुनाव में वह बिजनौर से हार गईं. इसके बाद उन्होंने अपना क्षेत्र बदला और 11वीं तथा 12वीं लोकसभा के चुनाव में वह दिल्ली के करोलबाग संसदीय क्षेत्र से विजयी होकर फिर संसद पहुंचीं. इसके बाद उन्होंने अपने पिता की पारंपरिक सीट बिहार के सासाराम की ओर रुख किया, जहां से उन्होंने साल 2004 और 2009 का लोकसभा चुनाव जीता। हालांकि, 2014 के चुनाव में मोदी लहर की आंधी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उन्हें भाजपा के छेदी पासवान ने 63 हजार से ज्यादा वोटों से हराया।