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गणतंत्र दिवस पर बेटियों ने साबित कर दिया : यह देश है वीर वीरांगनाओं का


जब कभी हम स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस के मौके पर झंडारोहण समारोह देखते है या देश के जवानों के परेड और करतब देखते है तो वह नजारा वाकई अद्भूत होता है.जिसे देख के रोम रोम में ‘यह देश है वीर जवानों का ‘ भाव उमड़ने लगता है. लेकिन इस बार गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ का नजारा कुछ और ही बयां कर रहा था. जिसने जहां से देखा वह वही ठहर गया.इस बार बारी हमारी बहनों की थी, हमारी बेटियों की थी जिन्होंने अपनी बहादुरी से सबको चकित कर दिया.यह आजादी के बाद पहला मौका था जब महिलाओं ने स्टंट और करतब दिखाने का मोर्चा संभाला.इन महिलाओं ने अपनी असधारण प्रतिभा का प्रदर्शन कर वहां मौजूद लोगों को यह मानने पर मजबूर कर दिया कि यह देश वीरों जवानें का तो है ही पर वीरांगनाएं भी किसी भी मोर्चे पर किसी से कम नहीं है.

 

जब महिला बीएसएफ की वीरांगनाएं हवा में झूलते हुए बाईक पर सवार होकर खतरनाक स्टंट कर रही थी तो वहां मौजूद हर कोई उनकी प्रतिभा और जज्बे को सलाम कर रहा था.राष्ट्रपति से लेकर पीएम तक हर कोई अपनी बेटियों की बहादुरी देख कर गौरवान्वित हो रहा था.बीएसएफ की 106 महिला कमांडो की इस टीम को सीमा भवानी नाम दिया गया था. BSF की महिला डेयरडेविल्‍स ने 16 तरह के स्‍टंट दिखाए, जिन्‍हें देखकर लोग अपनी सीटों से उठकर खड़े हो गए और उन्‍होंने महिला ‘डेयरडेविल्स’ के लिए तालियां बजाई.

इन महिला वीरांगनाओं ने अपने दम-खम से यह साबित कर दिया आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरूषों से कम नहीं है. जिन लोगों को यह लगता है कि महिलाएं यह नहीं कर सकती, वह नहीं कर सकती, ये काम तो पुरूषों के लिए ही बने है.ऐसे लोगों को अपनी सोच बदलने की आवश्यकता है. सच तो यही है कि हमारी बहन बेटियां आज के दौर में भी दुर्गा आदिशक्ति से कम नहीं है.किसी क्षेत्र में महिलाओं की कमी है या उनकी मौजूदगी नहीं है तो इसके पिछे सबसे बड़ी वजह है कि हमने उनको मौका नहीं दिए. आप देख सकते है कि पढ़ाई, फैशन, ग्लैमर, मीडिया ,पॉलिटिक्स, खेल के साथ साथ सैन्य और प्रशासनिक क्षेत्रों में भी महिलाओं ने अपना लोहा मनवाया है. जितने कम समय में बीएसएफ की इन महिलाओं ने सफलतापूर्वक हतप्रभ कर देने वाले एक से बढ़कर एक स्टंट प्रस्तुत किये उसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है.

 

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नए साल में भ्रष्टाचार के दीमक से कैसे बचाएं देश को , विचार करने की जरूरत है

माय टाइम्स टुडे। देश में आजादी के बाद सबसे ज्यादा अगर किसी दंश को हमने झेला है तो वह है भ्रष्टाचार. भ्रष्टाचार की खाई इतनी गहरी है कि हम घोटाले गिनते गिनते थक जाएंगे पर हमारी गिनती पूरी नहीं होगी. दूसरे शब्दों में ये कहे कि यहां योजनाएं बनती नहीं कि उससे पहले भ्रष्टाचार का दिमक उसमें लग जाता है और आखिर में योजना पूरी होते होते ये दीमक सब कुछ चाट पोट जाता है. देश में भ्रष्टाचार का प्रकोप इतना है कि आधे से अधिक कोर्ट के मामले तो भ्रष्टाचार से भरे है. एक केस की सुनवाई पूरी नहीं होती कि दूसरी कतार में खड़ी हो जाती है. शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर सड़क बिजली पानी तक, हर जगह भ्रष्टाचार व्याप्त है.अब प्रश्न यह है कि इस दंश के प्रकोप में आम आदमी किसके भरोसे और कब तक खड़ा रहेगा. जहां हर रोज भ्रष्टाचार होते हो, एक न्याय का फैसला आने में वर्षों लग जाते हो, बड़े बड़े आरोपी और घोटालों का न्याय तो सबूत के आभाव में दफन कर दिए जाते हो, सोचिए स्थिति कितनी गंभीर है.
फोर्ब्स के मुताबिक एशिया के शीर्ष भ्रष्ट देशों में भारत का स्थान सबसे ऊपर है.भारत से अच्छी स्थिति पाकिस्तान की है जो चौथे स्थान पर है. इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में रिश्वतखोरी की दर 69 प्रतिशत है. जबकि पाकिस्तान की 49 प्रतिशत है. वर्ल्ड बैंक की माने तो भारत को भ्रष्टाचार की वजह से प्रति वर्ष 0.5 प्रतिशत जीडीपी का नुकसान सहना पड़ता है. वही योजना आयोग की रिपोर्ट 2011 में कहा गया है कि भ्रष्टाचार की वजह से देश को हर साल 1.5 प्रतिशत का नुकसान सहना पड़ रहा है. जरा सोचिए समस्या कितनी गंभीर है और उसके निदान की कारवाई कितनी धीमी है. भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मंत्री बदल जाते हैं, सियासत और सत्ता के समीकरण बदल जाते है यहां तक की सरकार भी बदल जाती है पर भ्रष्टाचार यथावत बना रहता है. मुझे लगता है नए साल में देश को अगर स्वस्थ लोकतंत्र में आम जनता के विश्वास और उनके हितों की रक्षा करनी है तो सबसे पहले भ्रष्टाचार के दंश को उखाड़ फेंकना होगा.नहीं तो आने वाले दिनों में वैश्विक स्तर पर हमारी अर्थव्यवस्था दम घूंटती नजर आयेगी. इसलिए यह जरूरी है कि सरकार के साथ -साथ आम जन भी अपने अपने स्तर पर अपना ईमान पाक साफ रखें.वरना आने वाली पीढ़िया हमें माफ नहीं करेगी.

इंद्रभूषण मिश्र ।