तेरी सांसों को मेरी सांसों की उमर लग जाए

तुझे देखूं तो लगता है बस देखता रहूं, तुझपे लिखूं तो, जी करता है बस लिखता रहूं, ना देखने से जी भरता है, ना लिखने से जी थकता है, चाहत की एक बूंद भी तुमसे है, हसरतों का हर समंदर भी तुमसे है, लम्हों का एक एक कारवां भी तुमसे है, जींदगी का हर सफर भी तुमसे है, आस भी तुमसे है, प्यास भी तुमसे है, जीद भी तुझपे है, उम्मीद भी तुमसे है, तुझे पाकर मैं और भला क्या मांगू, बस यही दुआ है, तेरी सांसों को मेरी सांसों…

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तेरा होकर भी तुझमे मौन हूं मैं…

MY TIMES TODAY. mytimestoday.com किसी ने पूछा मेरे कौन हो तुम, मेरा जबाब कुछ यूं था, दिल से देखो तो आपके आईने की सूरत हूं, महसुस करो तो रुह से रुह तक की जरुरत हूं, प्यास लगे तो मुझे पी लेना, धड़कने गर थमे तो मेरी सांसों मे जी लेना, नींद गर ना आए तो मेरी आंखों मे सो जाना, कुछ ख्वाब गर जो अधुरे रह गए तो मेरे ख्वाबों को ले जाना, जीते जी कुछ काम आ सकू तो अपना लेना, गर फिर भी जो कुछ अधुरा रह गया…

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तेरा होके तेरे सपनों मे मगरुर हो जाता..

MY TIMES TODAY.  रात के अंधेरे मे अक्सर तेरी बातेँ याद आती हैँ, पलकेँ भीँग जाती हैँ जब तु हौले हौले मुस्कुराती हैँ, याद आते हैँ वो लम्हे जो साथ बिताए थे, निहारिका के बाहर जो गोलगप्पे खाये थे, जुबली पार्क की वो शाम कितनी सुहानी थी, जब मेरी बाहोँ मे लिपटी मेरी दिवानी थी, बस का वो सफर भी कितना मस्ताना था, तेरेँ आंचल मे लिपट के जो जाना था, कौफी हाउस के डोसे डामिनोज के पिज्जे, बहुप याद आते हैँ तेरे होठोँ के किस्सेँ, काश मैँ वही होता…

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उसकी एक याद बहुत हैं मुझे रूलाने के लिए… Mr.IBM

MY TIMES TODAY. lipstunes कभी इश्क जूनुन था, कभी आशिकी जीद थी, ना कुछ पाने की तम्मना थी, ना कुछ खोने का डर था, बेइंतहा चाहा था उन्हे, और बस वही एक उम्मीद थी, हर हसरत हंस के भूला दिया था, कि वो मिलेंगे ऐसा उसने भरोसा दिला दिया था, आज ना मेरी कोई मंजिल है, ना कोई सहारा हैं, तन्हाईयों में बेशुमार दिल है, कमब्खत वक्ता का मारा है, जी रहां हूं अपना ग़म भूलाने के लिए, पर उसकी एक याद बहुत हैं मुझे रूलाने के लिए… Mr.IBM

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तू दूर है इन आंखों से पर ओझल नहीं : कुमार इंद्रभूषण

MY TIMES TODAY.  तू दूर है मुझसे, मगर इन आंखों से ओझल नहीं, तेरी याद ना आये मुझे, ऐसा कोई पल नहीं, याद आते हैं वो लम्हें वो सारी बातें, कॉलेज के दिन और हॉस्टल की रातें, वो तेरे हसीन् नखड़े, बात – बात पे झगड़े, वो तेरा रूठना, और मेरा मनाना, वो कयामत का गुस्सा, याद आ रहा है आज एक – एक किस्सा, ये मचलती घटायें, ये बरसता सावन, बावला हुआ मैं, भींग रहा है ये मेरा मन, कह रही है मुझसे मेरी वफाएं, काश वो दिन फिर…

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