कविता – मां मेरी

मां मेरी… ———— मां मुझे तुम सबसे प्यारी, तुमसे जानी दुनिया सारी अच्छा-बुरा सब मैं न जानूं, मां मैं तुमको बस अपना मानूं मैंने तुमसे जन्म है पाया, तुमने ही संसार दिखाया मां मुझे तुम सबसे प्यारी, तुमसे जानी दुनिया सारी मां मैं जब-जब देखूं तुमको, मिलती खुशियाँ मेरे मन को मेरे जीवन की हर कठनाई, मां तुमने ही दूर भगाई मां मुझे तुम सबसे प्यारी, तुमसे जानी दुनिया सारी मां तुमने परछाई बनकर, साथ दिया है मेरा हरपल जब देखीं तकलीफें मेरी, उड़ जाती थीं नींदें तेरी मां मुझे…

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कविता – मेरे पापा

तबीयत ठीक है मेरी”, इस झूठ को एक पल में पकड़ लेते हैं। सलीके से बोली गई बात को पापा ना जाने कैसे पढ़ लेते है। दवाएं खीज जाती हैं, आपकी दुआओं का असर देखकर। सर पर हाथ आपका है,तो हम मौतों से भी लड़ जाते हैं। आपके कंधों की सैर हवा। के जहाजों में नहीं मिल पाती है। मेरी तुच्छ सी कारीगरी से, आंखे आपकी नम हो जाती है। नही स्वर्ग की आशा मुझको, आशीष आपका जन्नतों की पाती है। चरणों में हे ईश पिता, ये बेटी शत शत…

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कविता : “तमन्नाओं का पिटारा “

एमटीटी। कविता।  मां हमारी चांद, और हम उसके तारे थे। वो बचपन के दिन भी , तमन्नाओं के पिटारे थे। कभी हवा के जहाजों में तैरने का सपना। कभी टाफियों की बरसात की उम्मीद पनपना। कुल्फी और फुल्की, हमारे शाही भोजन थे। एक छोटा सा राज्य हमारा,और हम उसके राजन थे। सोनपरी और जादुई कलम पर,हमको पूरा भरोसा था। राम – कृष्ण की कथाओं ने, हमको पाला पोसा था। एक तमन्ना रखते थे हम,जल्दी से बड़े होना है। पर ये ना सोचा बड़े होकर,बचपन को ही खोना है। वे केवल…

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कि मैं एक बेटी हूं – कविता

धूप में भी,  छांव में भी, खुशी और ग़म में भी, ममता का आंचल समेटी हूं,  हां मैं एक बेटी हूं…… दुनिया वालों ने क्या – क्या न जुल्म किये, किसी ने रुलाया, किसी ने सताया, हवस के पापियों ने मेरे कपड़े तक को फार डाला, हंसते खिलती कली को जीते जी मार डाला, फिर भी, मैं सबकुछ भूल गई, प्यार और ममता की दरिया में घुल गई, फिर से एक नए कल को बाहों में समेटी हूं, हां मै एक बेटी हूं…….. हां मै एक बेटी हूं इसलिए  मुझे…

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कविता – न तुझको पता न मुझको पता

एमटीटी नेटवर्क।  मैं जब भी देखता हूं, तुझको ही देखता हूं, क्यों देखता हूं, ना तुझको पता न मुझको पता… जब भी सोचता हूं, तुझको ही सोचता हूं, क्या ख़्याल है क्या हाल है न तुझको पता न मुझको पता…. धूप है कि छांव है, ना गति है न ठहराव है, जहां तुम हो वहां मैं हूं कैसे कहें किससे कहें न तुझको पता न मुझको पता….#Mr.IBM

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