विशेष : किसी दल के नहीं भारत के नेता ‘अटल बिहारी वाजपेयी’

माय टाइम्स टुडे। भारतीय राजनीति का अजातशत्रु कहलाने का गौरव अगर किसी को प्राप्त है तो वो अटल बिहारी वाजपेयी ही हैं. अटल बिहारी वाजपेयी कभी दल विशेष के नेता नहीं रहे, वह तो भारत के नेता है. उन्हें भारतीय नेता के रूप में जाना जाता है. करीब 5 दशक के राजनीतिक जीवन में न जाने कितने उतार-चढ़ाव देखने वाले वाजपेयी सबके प्रिय बने रहने की कला के महारथी थे.1993 में जब जेेेेनेवा में मानवाधिकार सम्मेलन का आयोजन किया गया तब पी वी नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री थे .…

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मानना पड़ेगा कि बेतवा के पानी में कला की बूंदें है

एमटीटी नेटवर्क। समाजसेवा, सियासत और साहित्य..सिनेमा ये है विदिशा।कसम है हमार गोठ की.. आखिर तक पढ़ना ग्राउंड जीरो से लिख रहे हैं…! ये विदिशा कहाँ हैं, इस विदिशा का इतिहास क्या है, ये विदिशा किस जगह है, इस बात को मैंने इंडिया में ही कहते सुना है.. वजह बना है डांस। ये भी रिवाइज कर लिजिए… सीएम साहब ने ट्विटर पर डब्बूजी विदिशा वासी को बधाई दी… वही शिव’राज’ मंत्रियों ने कैलाश विजयवर्गीय को कैलाश सत्यार्थी जी की जगह नोबेल पुरस्कार विजेता की शुभकामना दी. याद है इतनी जल्दी तो बधाई…

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शिवराज की ‘किसान पुत्र’ की छवि को चोट पहुँचाने की रणनीति

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की’यूएसपी’ है- किसान पुत्र की छवि। यह छवि सिर्फ राजनैतिक ही नहीं, अपितु वास्तविक है। शिवराज सिंह चौहान किसान परिवार से आते हैं। उन्होंने खेतों में अपना जीवन बिताया है। इसलिए उनके संबंध में कहा जाता है कि वह खेती-किसानी के दर्द-मर्म और कठिनाइयों को भली प्रकार समझते हैं। किसानों के प्रति उनकी संवेदनाएं ही हैं कि मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही किसानों की खुशहाली के लिए नीति बनाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। वह पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने किसानों की आय…

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प्रणव मुखर्जी के संघ के कार्यक्रम में शामिल होने पर सियासत कहां तक सही है

एमटीटी नेटवर्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्थापना के समय से ही चर्चा में रहा है.  कई मौकों पर संघ पर आरोप भी लगे हैं, महात्मा गांधी की हत्या, दंगा से लेकर लोगों को बांटने तक का आरोप संघ पर लगा है. संंघ पर अब तक तीन बार प्रतिबंध भी लग चुका है. कांग्रेस हमेशा से संघ पर निशाना साधती रही है. लेकिन वही दूसरी तरफ संघ अपने कार्यों से कांग्रेस नेताओं की प्रशंसा का पात्र भी रहा है. चाहे बात भारत पाक बंटवारे की हो या 1963 के चीन युद्ध की,…

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जन्मदिन विशेष : वीर सावरकर

एमटीटी नेटवर्क।  काल स्वयं मुझसे डरा है. मैं काल से नहीं, कालेपानी का कालकूट पीकर, काल से कराल स्तंभों को झकझोर कर, मैं बार बार लौट आया हूं, और फिर भी मैं जीवित हूं, हारी मृत्यु है, मैं नहीं….।। ऐसे बहुत कम होता है कि जितनी ज्वाला तन में हो उतना ही उफान मन में हो. जिसके कलम में चिंगारी हो उसके कार्यों में भी क्रांति की अग्नि धधकती हो. वीर सावरकर ऐसे महान सपूत थे जिनकी कविता भी क्रांति मचाती थी और वह स्वयं भी क्रांतिकारी थे. उनमें तेज…

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