विशेष : दुर्योधन वध , सच बात सब बात

एमटीटी नेटवर्क। दुर्योधन और भीमसेन के युद्ध के ठीक बाद बलराम का आगमन होता है। बलराम दुर्योधन के कपट को कभी समझ नहीं सके थे। इसी कारण वश वे भीमसेन को मारने के लिए चल देते हैं। श्रीकृष्ण के समझाने पर उन्हें अपनी गलती का भान होता है। बलराम सिर्फ एक ही प्रश्न करते हैं कि दुर्योधन को हराने के लिए इतने कपट करने की क्या आवश्यकता थी। जिसके जवाब में श्रीकृष्ण ने बड़ी ही अच्छी बात कही थी कि जहर को जहर से मारना और कांटे को कांटे से निकालना…

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आईए जानें देश के विभिन्न हिस्सों में कैसे मनाया जाता है मकर संक्रांति

माय टाइम्स टुडे। हमारे देश में मकर संक्रांति का त्योहार धूम धाम से मनाया जाता है.देश के विभिन्न हिस्सें में इसे अलग अलग नामों से मनाया जाता है.आईए जानते है किस राज्य में किस नाम से मनाया जाता है मकर संक्रांति. उत्तर प्रदेश, बिहार : मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व कहा जाता है. सूर्य की पूजा की जाती है. चावल और दाल की खिचड़ी खाई और दान की जाती है. गुजरात और राजस्थान : उत्तरायण पर्व के रूप में मनाया जाता है. पतंग उत्सव का आयोजन किया जाता है. आंध्रप्रदेश :…

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हनुमानगढ़ी मंदिर अयोध्या : दर्शन मात्र से होती है हर मनोकामना पूरी

MY TIMES TODAY.अयोध्या दशरथ नंदन राम की नगरी है.जहां आज भी भगवान राम चौपड़ खेलते है. अयोध्या को मंदिरो की नगरी भी कहा जाता है.यहां हर घर में मंदिर है. हर चौक चौराहे पर एक से बढ़कर एक मंदिर है जो आज भी भगवान राम के साक्षात दर्शन की अनुभूति कराते हैं. ऐसा ही एक भव्य मंदिर है हनुमानगढ़ी जहां पर हनुमान जी की अद्भूत मुर्ति है. कहा जाता है कि जब भगवान राम लंका जीत कर लौटे तो हनुमान जी पर अत्यंत प्रसन्न थे. भगवान ने हनुमान को अयोध्या…

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माता सीता को मूुंह दिखाई में मिला था कनक भवन मंदिर

अयोध्या को भगवान राम की नगरी कहा जाता है.जहां हर एक गली में भगवान राम और सीता माता के मंदिर देखने को मिल जाएंगे. ऐसा ही एक भव्य मंदिर है कनक भवन.जहां भगवान राम आज भी माता सीता और उनकी सखियों के साथ चौपड़ खेलते है. अयोध्या नगर के हनुमान गढ़ी के निकट स्थित यह मंदिर सीता माता को कैकई की तरफ से भेंट स्वरूप मिला था. ऐसा कहा जाता है कि राम और सीता की शादी के बाद कैकई जब बहु का मुंह देखी तो उन्होंने भेंट स्वरूप कनक…

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सैद्धांतिक रूप से भारत आज भी परतंत्र है : पुरी पीठाधीश्वर

माय टाइम्स टुडे। भोपाल । शुक्रवार को नगर के मानस भवन मेें ‘वर्तमान परिस्थिति में धर्म के प्रति हमारा कर्तव्य’ विषय पर बोलते हुए पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी ने कहा कि आज हम भले स्वतंत्र है लेकिन सैद्धांतिक रूप से हम स्वतंत्र नहीं है. हमारे देश में न तो विकास के माध्यम अपने हैं न ही सेवा के प्रकल्प अपने हैं. हमारे सविंधान की आधारशीला हमारी नहीं है. सैद्धांतिक धरातल पर हम आज भी परतंत्र ही है. उन्होंने गौहत्या को लेकर कहा यूपी में वैध और अवैध बूचड़खाने खाने…

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