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अटल जी जयंती विशेष- अटल कभी मरते नहीं

‘हिंदू तन-मन, हिंदू जीवन, रग-रग हिंदू मेरा परिचय’
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ राजनीति के एक युग का अवसान हो गया है। यह युग भारतीय राजनीति के इतिहास के पन्नों पर अमिट स्याही से दर्ज हो गया है। भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों, आदर्शों और सिद्धांतों को जानने के लिए अटल अध्याय से होकर गुजरना ही होगा। अटल युग की चर्चा और अध्ययन के बिना भारतीय राजनीति को पूरी तरह समझना किसी के लिए भी मुश्किल होगा। उन्होंने भारतीय राजनीति को एक दिशा दी। उन्होंने वह कर दिखाया, जिसकी कल्पना भी कठिन थी। उस भारतीय जनता पार्टी को पहले मुख्य विपक्षी दल बनाया और बाद में सत्ता के शिखर पर पहुँचाया, जिसके साथ लंबे समय तक ‘अछूत’ की तरह व्यवहार किया गया। उन्होंने भाजपा के साथ अनेक राजनीतिक दलों को एकसाथ एक मंच पर लाकर सही अर्थों में ‘गठबंधन’ के सिद्धांत का प्रतिपादन किया। अपने सिद्धांतों पर अटल रहकर भी कैसे सबको साथ लेकर चला जाता है, यह दिवंगत वाजपेयी जी के राजनीतिक जीवन से सीखना होगा।
प्रखर और ओजस्वी वक्ता :
एक सांसद के रूप में अपने पहले कार्यकाल में ही अटल बिहारी वाजपेयी ने संसद में जो भाषण दिया था, उसे सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी अत्यधिक प्रभावित हुए थे, उन्होंने कह दिया था कि वह एक दिन देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। नियती ने उसी युवा अटल को पहले 13 दिन, फिर 13 माह और उसके बाद एक पूर्ण कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री के पद पर आसीन कर दिया। हम सब जानते हैं कि वह प्रखर और ओजस्वी वक्ता थे। अपनी वक्तत्व कला से वह सबको स्तब्ध और सम्मोहित कर देते थे। उनकी आवाज में ऐसा जादू था कि उनको सुनने के लिए दूर-दूर से लोग एकत्र आते थे। उनके देहांत के बाद जब उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया तब भी देश के कोने-कोने से ही नहीं अपितु विदेश से भी अनेक लोग आए। मानो, वे सब अंतिम बार अटल आवाज को सुनना चाहते हों।
देश का नेता कैसा हो, अटल बिहारी जैसा हो :
जननायक की अंतिम यात्रा में शामिल जनसमूह ने संदेश दिया है कि अटल जी सक्रिय राजनीति में थे तब और अब जब वह रहे नहीं तब भी देश की जनता उन्हें अपार प्रेम करती है। उनके जाने के बाद से देश में शोक की लहर है। लंबे समय बाद किसी नेता के जाने पर देश इस प्रकार शोक संतप्त है। सब अपने-अपने ढंग से अपने प्रिय नेता को याद कर रहे हैं। उन सबके पुण्य स्मरण का मिला-जुला संदेश यही है कि ‘देश का नेता कैसा हो, अटल बिहारी जैसा हो।’ जन-गण-मन से उठ रही यह गूँज आज के सभी राजनीतिक दलों और राजनेताओं को सुननी चाहिए। भले ही अटल सदैव के लिए गो-लोक धाम चले गए हों, किंतु जनता चाहती है कि उनका आचरण-चरित्र भारतीय राजनीति में उपस्थित रहे।
भारतीयता के ‘अटल’ प्रतिनिधि :
निश्चित ही अटलजी अजातशत्रु थे, जैसा कि उनके संबंध में कहा भी जा रहा है। उन्होंने कभी किसी से बैर नहीं ठाना। किसी के प्रति उनके मन में द्वेष और घृणा नहीं थी। वह व्यक्ति के विरोधी नहीं थे। बुराई के विरोधी थे। यद्यपि यह और बात है कि उनके वैचारिक विरोधी विशेषकर कम्युनिस्ट सदैव ही उनके प्रति ईर्ष्या का भाव रखते थे। अटल जी का प्रभाव और सामर्थ्य सदैव उनके वैचारिक विरोधियों की आँखों में किरकिरी बना रहा। यह लोग बहस के निचले स्तर पर जाकर अटल जी के प्रति अनर्गल टिप्पणियां करते रहे हैं। बहरहाल, जिसकी जैसी प्रवृत्ति, विचार और चिंतन होगा, उसका व्यवहार में उसी का प्रकटीकरण होगा। भारतीयता के ‘अटल’ प्रतिनिधि स्व. वाजपेयी जी ने सदैव अपने आचरण से राष्ट्रवादी विचार को प्रतिपादित किया। अपने विचार का विस्तार किया। उन्होंने अपनी वाणी और कर्म से भारत की चिति ‘हिन्दुत्व’ को देश-दुनिया के सामने रखा। उन्होंने अपने चरित्र से सबको हिन्दुत्व से परिचत कराया- ‘हिंदू तन-मन, हिंदू जीवन, रग-रग हिंदू मेरा परिचय।’
विचार के रूप में सदैव उपस्थित रहेंगे अटलजी :
एक पत्रकार से राजपुरुष तक की उनकी यात्रा कई मायनों में अद्भुत और अकल्पनीय रही है। उनके द्वारा खींची लकीर सदैव भारतीय राजनीति का मार्गदर्शन करेगी, यह विश्वास किया जा सकता है। अटलजी ने एक सपना देखा था कि उनकी पार्टी और विचार की गूँज देश के हर कोने से आए, आज जब उनका यह सपना साकार हो गया है, तब इस भरोसे के साथ उन्हें अंतिम विदाई कि वह भारतीय राजनीति में अपने विचार के रूप में सदैव उपस्थित रहेंगे।
लेख : लोकेंद्र सिंह
पत्रकार, लेखक, कवि व मीडिया शिक्षक (एमसीयू भोपाल)
साभार : https://apnapanchoo.blogspot.com/2018/08/Atal-never-dies.html?m=1
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The butterfly effect

My Times Today. Roughly two decades ago, Doresanipalya forest research station, on the outskirts of Bengaluru, found itself ambushed a ring of glass and concrete monoliths. Borewells on the 91 acre campus turned into a paradise for butterflies. The Bangalore butterfly club decided that this oasis of green must to be put on their butterfly spotting map.

Every fortnight Rohit Girotra a management professional gathers a group of enthusiastic and merely butterfly curious. The free guided walks through the campus usually take three hours. Those with cameras crouch, bend and hold their breath to capture the frisky beauties.