जयंती विशेष बिस्मिल्लाह खान : बेगम से अधिक शहनाई को चाहते थे बिस्मिल्लाह

जब कभी शहनाई की धुन हमारे कानों में गूंजती है तो मन में सबसे पहले ख्याल भारत रत्न बिस्मिल्लाह खान का आता है।देश ही नहीं वरन् दुनिया भर में शहनाई को वैश्विक पहचान दिलाने वाले बिस्मिल्लाह खान शहनाई को अपनी महबूबा समझते थे। शहनाई उनकी जिंदगी का आधार बन गयी थी। वह शहनाई के साथ ही सोते थे और शहनाई के साथ ही उनकी सुबह भी होती थी। बिस्मिल्ला खां का जन्म 21 मार्च 1916 को बिहार के डुमरांव में हुआ था। पैगम्बर खां और मिट्ठन बाई के यहां जन्मे…

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विशेष : तीन विश्व कप 344 मैच बाद जब द्रविण ने उठाया वर्ल्ड कप

भारतीय अंडर 19 क्रिकेट टीम ने फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराकर चौथी बार विश्वकप का खिताब़ अपने नाम कर लिया है.निश्चित रूप से क्रिकेट जगत में भारत की यह सबसे बड़ी जीत है.क्योंकि 2011 के बाद भारत कोई बड़ा टुर्नामेंट जीत नहीं पाया था.ऐसे में इन युवा जबांजों का वर्ल्ड कप जीतना देश के लिए किसी तोहफे से कम नहीं है.चुनाव, सियासत और बजट की तू – तू मैं – मैं में फंसी जनता को इन छोरों ने वाद विवाद से अलग हटकर जश्न मनाने का एक नायाब तोहफा दिया…

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बजट 2018 : अपने वादों पर कायम रही सरकार तो क्रांतिकारी साबित होगा यह बजट

जरा सोचिए कि गांवों के किसान खुशहाल हो जाएं, गांवो में हर घर में एलपीजी कनेक्शन हो.हर गरीब के सर पर छत हो, हर घर को बिजली और बेहतर स्वास्थ्य लाभ के साथ साथ गांवों में बेहतर इंटरनेट फैसिलिटी हो तो क्या यह किसी क्रांति से कम होगा क्या ? वित मंत्री अरूण जेटली ने गुरूवार को आम बजट पेश किया.मोदी सरकार के इस कार्यकाल का यह आखिरी बड़ा बजट था.सरकार के इस बजट को राजनीतिक गलियारें में अलग अलग चश्में से बजट को देखा जा रहा है.जहां एक तरफ…

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गणतंत्र दिवस पर बेटियों ने साबित कर दिया : यह देश है वीर वीरांगनाओं का

जब कभी हम स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस के मौके पर झंडारोहण समारोह देखते है या देश के जवानों के परेड और करतब देखते है तो वह नजारा वाकई अद्भूत होता है.जिसे देख के रोम रोम में ‘यह देश है वीर जवानों का ‘ भाव उमड़ने लगता है. लेकिन इस बार गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ का नजारा कुछ और ही बयां कर रहा था. जिसने जहां से देखा वह वही ठहर गया.इस बार बारी हमारी बहनों की थी, हमारी बेटियों की थी जिन्होंने अपनी बहादुरी से सबको चकित…

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नए साल में भ्रष्टाचार के दीमक से कैसे बचाएं देश को , विचार करने की जरूरत है

माय टाइम्स टुडे। देश में आजादी के बाद सबसे ज्यादा अगर किसी दंश को हमने झेला है तो वह है भ्रष्टाचार. भ्रष्टाचार की खाई इतनी गहरी है कि हम घोटाले गिनते गिनते थक जाएंगे पर हमारी गिनती पूरी नहीं होगी. दूसरे शब्दों में ये कहे कि यहां योजनाएं बनती नहीं कि उससे पहले भ्रष्टाचार का दिमक उसमें लग जाता है और आखिर में योजना पूरी होते होते ये दीमक सब कुछ चाट पोट जाता है. देश में भ्रष्टाचार का प्रकोप इतना है कि आधे से अधिक कोर्ट के मामले तो भ्रष्टाचार…

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