35ए के बारे में अ से लेकर ब तक सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं

एमटीटी। जीएसटी के बाद देश में “एक देश, एक टैक्स “लागू हो गया है। एक देश एक चुनाव की मांग पहले से हो रही है तो ऐसे में एक देश एक कानून क्यों नहीं? यह मुद्दा इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि देश में इन दिनों अनुच्छेद 35 ए को लेकर चर्चा हो रही है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गयी है। अगली सुनवाई की तारीख 27 अगस्त तय हुई है। यह मुद्दा कश्मीर का होते हुए भी सीधे – सीधे देश से जुड़ा है। देश के लोगों से जुड़ा है इसलिए राजनीति भी…

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नीतीश – शाह “हर एक मुस्कुराहट मुस्कान नहीं होती”

#ख_से_खबर। नफरत हो या मोहब्बत आसान नहीं होती, हर एक मुस्कुराहट मुस्कान नहीं होती। यह पंक्तियां बिहार की राजनीति में बहुत हद तक सही साबित हो रही हैं। इन दिनों बिहार में आगामी लोकसभा को देखते हुए एनडीए में सीटों के बंटवारे को लेकर सियासी पारा हाई है। अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि कौन कितनी सीटों पर चुुुुनाव लड़ेगा। सभी सहयोगी दल अपने- अपने दावे जरूर ठोक रहे हैं, पर खुलकर कोई न तो बोल पा रहा है न ही खामोशी की चादर ओढ़े सो पा रहा…

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मोदी की हत्या की साजिश पर सियासत ठीक नहीं

एमटीटी नेटवर्क। देश में पीएम मोदी की हत्या की साजिश को लेकर सियासत तेज हो गयी है. सरकार और विपक्ष दोनों ही इस मुद्दें पर सियासत कर रही है. भाजपा विपक्ष पर निशाना साध रही है वही विपक्ष भाजपा को इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा करने का आरोप लगा रही है. प्रश्न यह है कि क्या पीएम की हत्या की साजिश पर राजनीति होनी चाहिए. क्या इस मुद्दें को दलित राजनीति का रंग देना सही है. दरअसल इस साजिश का खुलासा तब हुआ जब पुणे पुलिस ने भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में पांच आरोपियों को…

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कर्नाटक चुनाव : जिसकी लाठी उसकी भैंस

एमटीटी नेटवर्क। कर्नाटक में सच में नाटक बहुत है. अभी तक किसी भी दल के पास पूर्ण बहुमत नहीं था. सभी अपनी अपनी सरकार बनाने का दावा कर रहे थे. एक तरफ 104 सीटों के साथ यदियुरप्पा सरकार बनाने की कवायद शुरू कर रहे थे तो दूसरी तरफ कुमार स्वामी जेडीएस और कांग्रेस की गठबंधन वाली सरकार बनाने का दावा पेश कर रहे थे. तब गेंद राज्यपाल के पाले में थी. आखिरकार राज्यपाल अपना फैसला सुना दिया. राज्यपाल का फैसला भी उम्मीदों के अनुरूप ही आया. राज्यपाल ने बड़ी पार्टी होने…

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शहीदी दिवस : कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर ना आए

आज शहीदी दिवस है.आज ही के दिन भारत मां के तीन वीर सपूतों को फांसी दे दी गयी थी. शहीद भगत सिंह ,राजगुरू और सुखदेव को 23 मार्च 1931 को फांसी दे दी गयी. अंग्रेज इतने भयभीत थे कि कहीं विद्रोह न हो जाए तो इसी बात को मद्देनजर रखते हुए उन्होंने एक दिन पहले यानी 23 मार्च 1931 की रात को ही भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी और चोरी छिपे उनके शवों को जंगल में ले जाकर जला दिया. वतन के इन फरिश्तें ने देश की…

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