कविता : इसी काल खंड में जमाने का दस्तूर बदलूंगा…..

फर्श है तो अर्श भी है,
मुश्किलें हैं तो संघर्ष भी है,
बाधाओं से डर जाऊं,
यह मुमकिन नहीं,
जीत जाऊं तो जश्न है,
हार जाऊं तो भी गमगीन नहीं,
न राह बदलूंगा,
न रूह बदलूंगा,
इसी काल खंड में,
जमाने का दस्तूर बदलूंगा……

Indrabhushan Mishra

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