पांच दिन पांच संदेश : पहला संदेश (मालवा)

चुनावी सीजन में सर्वे के चर्चे चारों ओर हैं। राजनीति में पार्टी के चेहरे भी होते हैं। मतलब वो कहीं भी जाएं जीत तो तय है। चलिए ऐसे ही चेहरे पर एक झलक डालते हैं।
सबसे पहले महाकाल की महानगरी में 21 वीं सदी के सियासतदारों की बात करते हैं। उज्जैन में एक किस्सा है कि यहाँ कोई राजशाही रात को आराम नहीं फरमां सकता यदि रूकता है तो कुर्सी चली जाती है। खैर कभी मध्यप्रदेश में बीजेपी को सत्ता में लेनेवाले अनिल माधव दवे इसी धरा पर जन्मे। हालांकि मोदी सरकार में मंत्री रहे अनिल माधव दवे की कमी खल रही है। सियासत के साथ साहित्य का मालवा इलाके में अनोखा संगम है। कवि प्रदीप भी इसी धरा पर अवतरित हुए। अब महाकाल के दरबार में युवा शक्ति माथा टेकती है।

मालवा में युवा और महिला शक्ति :

कांग्रेस ने कुणाल चौधरी को कालापीपल से और जीतू पटवारी को राऊ से चेहरा बनाया है। दोनों भाई ने युवाओं के बीच काफी पैठ जमा रखी है।साथ ही इस इलाके में महिला शक्ति का भी वर्चस्व है। बीजेपी ने बुरहानपुर से अर्चना चिटनीस को कैंडिडेट बनाया है जो शिवराज सरकार में मंत्री हैं। साथ ही इंदौर से मालिनी गौड़ को ईनाम मिला है इंदौर – 4 से, महापौर मालिनी गौड़ ने इंदौर को देश का नंबर – 1 शहर बनाने के लिए क्रेडिट जाता है। दो महिला नेता के साथ ही पिता-पुत्र का सियासी खेल जारी है। इंदौर – 3 से कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय बाजी मार सकते हैं।
मालवा में मंत्री जी का क्या होगा :
हाटपिपल्या से दीपक जोशी को स्कूली बच्चों की विसेज वीनर बना सकती है। मतलब स्कूल शिक्षा मंत्री के तौर पर दीपक जोशी ने ठीक काम किया है। मंत्री विजय शाह ने बयान के अलावा इलाके में कितना योगदान दिया है वो 11 दिसंबर को मालूम चल जाएगा। किसानों के शुभचिंतक राज्यमंत्री बालकृष्ण पाटीदार भी प्रजा का मन खरगोन से जीत सकते हैं। मंत्री अंतर सिंह आर्य के रिजल्ट का अंतर दिलचस्प होगा। उज्जैन उत्तर से पारस जैन की जीत होगी?

मालवा में इनको सत्ता का मलाल:
मध्यप्रदेश विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष बाला बच्चन को सत्तापाने का मलाल अब सर्वे के मुताबिक पूरी हो जाएगी? बड़वानी जिले के राजपुर से बाला बच्चन कांग्रेस के सीट पर विजय पताका लहरा सकते हैं। (अगला मध्य )

 लेखक : शुभम द्विवेदी

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!