विशेष : भारतीय राजनीति के अजेय योद्धा अटल बिहारी वाजपेयी

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अटल बिहारी बाजपेयी भारत के बेमिसाल नेताओं में से एक है। अटल बिहारी बाजपेयी, भारत के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। अटल के नाम तो पीएम के रूप में सबसे कम समय तक पीएम रहने का रिकॉर्ड है मात्र 13 दिन। पीएम के रूप वे हमेशा लोगों से जुड़े रहे और कविता के माध्यम से लोगों के बीच में अपनी पहुंच बना पाने में कामयाब रहे. आज अटल केवल अटल नहीं है बल्कि वे भारत रत्न हैं। इनके जीवन की बहुत सारी ऐसी घटनाऐं हैं जो देश की सारी जनता को प्रेरित करती हैं. राजनीति के क्षेत्र में अटल को रोल मॉडल के रूप में माना जाता है बल्कि यूं कहां जाए कि वे रोल मॉडल हैं. कारगिल के माध्यम से पड़ोसी देश पाकिस्तान को नाकों चने चबाना हो या अमेरिका की लाख पाबंदियों के बावजूद पोखरण में परमाणु परीक्षण कर भारत को परमाणु संपन्न बनाया है।

भारत की राजनीति में उन्होंने कई ऐसे उदाहरण पेश किए है जो उन्हें महान बनाता है. वे हमेशा सभी को साथ लेकर चलने वाले नेता है. वे हमेशा कहते थे कि मत में विविधता हो सकती है लेकिन मन में विभेद नहीं होना चाहिए. जनसंघ से भाजपा को बनाना और आज की भाजपा बनाने में अटल बिहारी का विशेष योगदान है. संसद में उनकी सरकार बहुमत साबित करने में असफल हो गई तो उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा था कि अंधेरा छंटेगा,सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा. जब 1999 में अविश्वास प्रस्ताव संसद में लाया गया तो निर्णायक वोट गिरधर गंजाम ने डाला. गिरधर गंजाम उस समय ओडिशा के कोरापुट से सांसद थे. इसके साथ वे ओडिशा के मुख्यमंत्री भी थे. गंजाम को ओडिशा का मुख्यमंत्री बने पूरे दो महीने हो चुके थे. उन्होंने दो महीने बाद भी इस्तीफा नहीं दिया और अविश्वास प्रस्ताव में भाग लेने संसद गए. संसद में चल रहे अविश्वास प्रस्ताव में निर्णायक मत देकर अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार को गिरा दिया. प्रधानमंत्री के रूप में अटल हमेशा सभी के लिए उपलब्ध रहे हैं.

वे अपनी पार्टी और विपक्षी पार्टी में पसंद किए जाने वाले निर्विवाद नेता रहे हैं. सरकार के गिर जाने के बाद 1999 में दुबारा चुनाव हुए तो बाजपेयी जी ने फिर सरकार बनाई. गठबंधन वाली एक ऐसी सरकार बनाई जिसकी आज मिसाल दी जाती है. इसी वर्ष मतलब 1999 में ओडिशा में साइक्लोन आया और बाजपेयी स्थिति का जायजा लेने ओडिशा पहुंचे. भुवनेश्वर एयरपोर्ट पर जब तत्कालीन पीएम अटल बिहारी बाजपेयी पहुंचे तो उनके स्वागत में ओडिशा के मुख्यमंत्री गिरधर गंजाम थे. गंजाम वही थे जिन्होंने बाजपेयी सरकार को गिराने में अहम भूमिका निभाई थी. जब बाजपेयी जी प्लेन से उतरे तो गिरधर का झुका चेहरा देखकर वे मुस्कुराने लगे और दोनों एयरपोर्ट से निकलकर चले गए. भुवनेश्वर में दोनों के बीच घंटों बात हुई. ऐसा व्यक्तिव्य था अटल बिहारी बाजपेयी का.

राजनीति में कई बार गलतफहमी हो जाती है. एक ऐसी ही गलतफहमी अटल बिहारी के साथ हुआ. बंगलादेश बनने की कहानी सभी जानते हैं. पाकिस्तान से युद्ध के बाद बंगलादेश की उदय हुआ. यह सब 1971 में हुआ. उस समय भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थी. इंदिरा गांधी को दुर्गा कहने वाला अटल बिहारी बाजपेयी का बयान सबके सामने आया. लगभग सभी समाचार-पत्र, पत्रिकाओं में छपने के बाद अटल बिहारी बाजपेयी ने इसका खंडन किया और कहा कि मैंने इंदिरा को दुर्गा नहीं कहा.

विनय कुशवाहा।

पत्रकार एबीपी न्यूज़।

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