35ए के बारे में अ से लेकर ब तक सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं

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एमटीटी। जीएसटी के बाद देश में “एक देश, एक टैक्स “लागू हो गया है। एक देश एक चुनाव की मांग पहले से हो रही है तो ऐसे में एक देश एक कानून क्यों नहीं? यह मुद्दा इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि देश में इन दिनों अनुच्छेद 35 ए को लेकर चर्चा हो रही है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गयी है। अगली सुनवाई की तारीख 27 अगस्त तय हुई है। यह मुद्दा कश्मीर का होते हुए भी सीधे – सीधे देश से जुड़ा है। देश के लोगों से जुड़ा है इसलिए राजनीति भी खूब हो रही है। अलगवादियों ने इसके विरोध में जम्मू कश्मीर बंद का ऐलान किया है, कई जगह हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। अमरनाथ यात्रा तक रोक दी गयी है।

जम्मू की पार्टियां पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस आदि किसी भी कीमत पर 35-ए हटाने के लिए तैयार नहीं है। कांग्रेस खुलकर भले कुछ नहीं बोल रही पर वह भी नहीं चाहती कि 35-ए हटे। अगर बीजेपी की बात की जाए तो बीजेपी के घोषणा पत्र में 35-ए को खत्म करने का उल्लेख था पर पिछले चार सालों में सरकार ने कोई ठोस पहल की हो, ऐसा अभी तक हुआ नहीं है। हालांकि अब राज्य में पीडीपी से गठबंधन खत्म होने के बाद बीजेपी जरूर कोशिश करेगी कि मामले को जोर शोर से उठाया जाए। क्योंकि इस मुद्दे पर लोकसभा का गणित बहुत हद तक निर्भर करने वाला है। 35-ए जम्मू कश्मीर का मुद्दा होते हुए भी देश से किस तरह सीधे – सीधे जुड़ा है, हम समझने का प्रयास करते हैं…..

क्या है 35 ए : 
35-ए वह अनुच्छेद है जो भारत को कई मामलों में जम्मू कश्मीर से अलग करता है। अनुच्छेद 35-A से जम्मू कश्मीर को ये अधिकार मिला है कि वो किसे अपना स्थाई निवासी माने और किसे नहीं? इसके अनुसार 14 मई 1954 से पहले जो कश्मीर आए, वे वहां के नागरिक हैं लेकिन जो लोग उसके बाद आए, वे स्थाई तौर पर जम्मू कश्मीर के नागरिक नहीं बन सकते हैं। दूसरे राज्यों के निवासी ना कश्मीर में जमीन खरीद सकते हैं, ना राज्य सरकार उन्हें नौकरी दे सकती है। इतना ही नहीं अगर जम्मू-कश्मीर की कोई महिला भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर ले तो उसके अधिकार छीन लिए जाते हैं। संपत्ति छीन ली जाती है। अगर महिला पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के निवासी से शादी करे तो उसके अधिकार नहीं छीने जाते है। कुल मिलाकर 35 ए भारत की उस भावना पर चोट करता है, जो भारत को एक सूत्र में जोड़ती है।
35 A का इतिहास : 
14 मई 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद द्वारा एक आदेश पारित किया गया था। ये आदेश तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की कैबिनेट की सलाह पर जारी हुआ था। इस आदेश के जरिये भारत के संविधान में एक नया अनुच्छेद 35-A जोड़ दिया गया। यह धारा 370 का ही एक भाग है। 35-ए को लेकर लगातार सवाल होता रहा है कि इसे सीधे राष्ट्रपति से लागू करवाया गया है। किसी भी संसद में इसको लेकर चर्चा नहीं हुई। इसे हटाने के पीछे इस बात की दलील दी जा रही हैै।

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