दूसरा स्वतंत्रता संग्राम था आपातकाल : प्रफुल्ल केतकर

माय टाइम्स टुडे। माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय में मंगलवार को आपातकाल, लोकतंत्र और मीडिया विषय पर संविमर्ष का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात चिंतक और विचारक हरेंद्र प्रताप और मुख्य वक्ता के रूप में ऑर्गनाइज़र के संपादक प्रफुल्ल केतकर उपस्थिति रही।

इस मौके पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित ऑर्गनाइजर के संपादक और जाने माने पत्रकार प्रफुल्‍ल केतकर ने कहा कि आपातकाल देश का दूसरा सबसे बड़ा स्वतंत्रता संग्राम था। आपातकाल के विरूद्ध लाखों लोगों ने आंदोलन किया था। देशभर में युवाओं, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तारियां देनी पड़ी थी। कई लोगों को जेल में रखा गया। अनेक यातनाएं दी गयी। उस समय सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग किया जा रहा था। सत्ता के साथ-साथ न्यायिक व्यवस्था पर भी इंदिरा गांधी नियंत्रण करने की कोशिश कर रहीं थी। कोर्ट के आदेश के बाद भी इंदिरा गांधी ने इस्तीफा नहीं दिया। गुजरात में छात्रों ने और बिहार से जयप्रकाश नारायण ने आंदोलन को देशव्यापी बनाने का कार्य किया।

     श्री केतकर ने कहा कि आंदोलन को सक्रिय बनाने में संघ के स्वयंसेवको ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि जय प्रकाश नारायण ने आंदोलन का नेतृत्व किया लेकिन उसको वास्तविक आधार देने में स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। स्वयंसेवकों ने रातों रात पर्चे बांटने और सूचनाओं के आदान-प्रदान का कार्य किया। इस कार्य में महिलाओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके इस योगदान पर शोध कार्य किया जाना चाहिये।

     कुछ लोग आपातकाल के नाम पर लोकतंत्र को खोखला बना रहे हैं : श्री केतकर ने कहा कि आज ऐसे कई लोग है जो कहते हैं कि देश में आपातकाल की स्थिति बन गयी है। वास्तव में उन्हें आपातकाल के दर्द का अनुभव नहीं है। उन्हें पता ही नहीं है कि आपातकाल होता क्या है। जब शासन का उपयोग व्यक्तिगत स्वार्थ और परिवारवाद के लिए होता है तो वह आपातकाल होता है। आज कुछ लोग आपातकाल के नाम पर लोकतंत्र को खोखला बनाने का प्रयास कर रहे है।

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