विशेष : किसी दल के नहीं भारत के नेता ‘अटल बिहारी वाजपेयी’

You can share it


माय टाइम्स टुडे। भारतीय राजनीति का अजातशत्रु कहलाने का गौरव अगर किसी को प्राप्त है तो वो अटल बिहारी वाजपेयी ही हैं. अटल बिहारी वाजपेयी कभी दल विशेष के नेता नहीं रहे, वह तो भारत के नेता है. उन्हें भारतीय नेता के रूप में जाना जाता है. करीब 5 दशक के राजनीतिक जीवन में न जाने कितने उतार-चढ़ाव देखने वाले वाजपेयी सबके प्रिय बने रहने की कला के महारथी थे.1993 में जब जेेेेनेवा में मानवाधिकार सम्मेलन का आयोजन किया गया तब पी वी नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री थे . उन्होंने दलगत भावना से उपर उठकर अटल बिहारी वाजपेयी को विपक्ष का नेता होने के बाद भी संयुक्त राष्ट्र संघ में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजा था. पूरी दुनिया इस फैसले से हैरान थी . जब वो बोलते थे तो पूरा संसद उन्हें सुनता था. वे सबको साथ लेकर चलने में विश्वास रखते थे. उन्होंने 20 से ज्यादा पार्टियों का गठबंधन बनाकर सरकार को बखूबी चलाकर दिखाया था. वर्ष 1957 में अटल जी पहली बार संसद में पहुंचे थे तब पंडित जवाहर लाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे. ऐसा कहा जाता है कि अटल जी की भाषण शैली से जवाहर लाल नेहरू इतने प्रभावित हुए थे कि उन्होंने कहा था कि ये नवयुवक कभी ना कभी देश का प्रधानमंत्री ज़रूर बनेगा. 

अटल जैसा कोई नहीं : 

सच कहा जाए तो भारतीय राजनीति में कई सरीखे नेता हुए. लेकिन कई मायनों में अटल बिहारी सबसे अलग थे. चाहे राजनीति की रणनीति कौशलता की बात हो या वाक्पटुता की. बात उनकेे व्यवहार या विचार की हो या उनके चिंगारी भरे कविताओं की, अटल को कोई जोड़ नहीं था. यही कारण है कि जब वे बोलते थे तो विपक्षी भी ताली बजाते थे. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब कोएलिशन ईयर्स में अटल बिहारी के अनमैचेबल स्टेट्समैन होने की बात स्वीकारी है. 

जब राजीव गांधी ने की थी मदद : 

अटल बिहारी ने एक बार कहा था कि अगर वह जिंदा है तो राजीव गांधी की वजह से ही है. उन्होंने कहा कि जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे तो उन्हें पता नहीं कैसे पता चल गया कि मेरी किडनी में समस्या है और इलाज के लिए मुझे विदेश जाना है.  उन्होंने मुझे अपने दफ्तर में बुलाया और कहा कि वह उन्हें आपको संयुक्त राष्ट्र में न्यूयॉर्क जाने वाले भारत के प्रतिनिधिमंडल में शामिल कर रहे हैं और उम्मीद है कि इस अवसर का लाभ उठाकर आप अपना इलाज करा लेंगे. तब मैं न्यूयॉर्क गया और आज इसी वजह से मैं जीवित हूं.

भारत जमीन का टुकड़ा नहीं,
जीता जागता राष्ट्रपुरुष है।
हिमालय मस्तक है, कश्मीर किरीट है,
पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं।
पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघायें हैं।
कन्याकुमारी इसके चरण हैं, सागर इसके पग पखारता है।
यह चन्दन की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है,
यह तर्पण की भूमि है, यह अर्पण की भूमि है।
इसका कंकर-कंकर शंकर है,
इसका बिन्दु-बिन्दु गंगाजल है।
हम जियेंगे तो इसके लिये
मरेंगे तो इसके लिये – अटल बिहारी वाजपेयी।

 


अटल को देखने पहुंचे दिग्गज : 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी वाजपेयी के स्वास्थ्य की जानकारी लेने एम्स पहुंचे. आधिकारिक बयान के अनुसार , मोदी ने डॉक्टरों से भेंट कर वाजपेयी के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली. साथ ही सरसंघचालक मोहन भागवत और भाजपा नेता लालकृष्ण आडवानी भी उनका हालचाल जानने एम्स पहंचे. 

हालत स्थिर लेकिन अभी एम्स में रहेंगे :  

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की ओर से मंगलवार को जारी मेडिकल बुलेटिन में कहा गया है कि वाजपेयी का स्वास्थ्य स्थिर. फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है. हालांकि संक्रमण ठीक होने तक वे एम्स में ही भर्ती रहेंगे. 

इंद्रभूषण मिश्र। 

Related posts

Leave a Comment