मिश्रा जी कहिन: इश्क : स्वाद के साथ सेहत भी

इश्क तो आपने सुना ही होगा. वैसे भी मैं कोई दर्शनशास्त्र तो बताने वाला हूं नहीं ,न ही आपको इश्क प्यार मोहब्बत और प्रेम के जड़ चेतन में ले जाना चाहता हूं. मैं तो आपको इश्क की सैर कराने आया हूं. हमें अक्सर इश्क से बचने की सलाह दी जाती है. प्रेम को रोग बोला जाता है. इश्क को आग, दरिया समंदर न जाने कितने संबोधन दिये गए हैं. मगर फिर भी दिल है कि मानता नहीं. इश्क हो ही जाता है. वैसे जो इश्क को बुरा – भले कहे उनको कहने दीजिए. सच तो यही है कि इश्क में मजा भी है, स्वाद भी है और सेहत भी है. इसलिए हम  कहते हैं ‘ इश्क : स्वाद के साथ सेहत भी‘. अब ये भी जान लीजिए कि मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं :

तनाव से मुक्ति : 

किसी भी इंसान के लिए तनाव बहुत बड़ा फैक्टर होता है. आज की भाग दौड़ में तनाव कॉमन हो गया है. लेकिन अगर आपको इश्क है तो यकीन मानिए दुनियादारी से तनाव तो कम होगा ही. आजकल तो लोग दूर रहकर भी फोन से शोना बाबू बेबी कह के दिल बहला लेते है. अगर प्रेमी प्रेमिका में बहुत ज्यादा अनबन न हो, वैसे भी अनबन को भला इश्क कहता कौन है ,तो यकीन मानिए कभी शोना बाबू तनाव में नहीं रहता है. परीक्षा से लेकर जॉब ऑफिस हर जगह शोना बाबू का ख्याल रखा जाता है. आजकल तो इमोज़ी भी चलन में है. अब बताईए चिंता मुक्त तो स्वास्थ्ययुक्त होगा ही.

खाने – पीने का ख्याल रखना : 

‘मेला शोना बाबू थाना थाया ‘ क्यों कुछ गलत तो नहीं कह रहा. यह मैसेज आपके स्क्रिन पर होता है कि नहीं ? आजकल तो खाने की तस्वीर भी भेजनी पड़ती है. और समय से न खाये तो डांट भी पड़ती है. ये डांट ममी पापा वाली नहीं होती है. ये डांट फोन तोड़ने और नंबर ब्लॉक करने वाली होती है. इसलिए बेहतर है कि खा ही लो. वैसे भी आजकल के बच्चे अपने आज्ञाकारी बेटा- बेटी नहीं, आज्ञाकारी शोना बाबू होते है.

इश्क की मीठी गोली : 

आप तो समझ ही गए होंगे कि मीठी गोली क्या है. आप जब कोई मीठा चीज खाते है तो जीभ और होंठ कैसे चटकारते हैं. समझ गए न मैं क्या कहना चाह रहा हूं. ये इश्क की मीठी गोली जो अक्सर फोने से शोना बाबू को ट्रांसफर की जाती है. बहुत फायदेमंद होती है. स्वाद में ये किसी भी तरह से शक्कर से कम मीठी नहीं होती है. वैसे भी डिमांड और उपलब्धता के आधार पर इश्क के अन्य उत्पाद भी सहज ही मिल जाते है जो स्वास्थवर्धक और स्वादयुक्त होते हैं. इसीलिए मैं कहता हूं ” इश्क : स्वाद के साथ सेहत भी ” .

इंद्रभूषण मिश्र।

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