अब बिना UPSC दिये भी बन सकते है IAS अधिकारी

अब प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी भी मंत्रालयों में ज्वाइंट सेक्रेटरी बन सकते हैं. सरकार की ओर से तर्क दिया गया है कि इससे मंत्रालय देश के ज्यादा अनुभवी लोगों का लाभ ले पाएगा. बता दें कि मोदी सरकार बनने के बाद से ही बदलाव करने की चाह रहे थे.

सालों से लंबित था प्रस्ताव, अब हुआ लागू 
ब्यूरोक्रेसी में लैटरल ऐंट्री का पहला प्रस्ताव 2005 में ही आया था, जब प्रशासनिक सुधार पर पहली रिपोर्ट आई थी. लेकिन तब इसे सिरे से खारिज कर दिया गया. फिर 2010 में दूसरी प्रशासनिक सुधार रिपोर्ट में भी इसकी अनुशंसा की गई. लेकिन पहली गंभीर पहल 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद हुई. पीएम मोदी ने 2016 में इसकी संभावना तलाशने के लिए एक कमिटी बनाई.

सरकार ने जारी की अधिसूचना : 

इसको लेकर अधिसूचना जारी कर दी गयी है. 30 जुलाई तक आवेदन तक मांगे गए  है. साथ ही 15 साल का अनुभव होना जरुरी है.  बता दें कि नियुक्त होने वाले जॉइंट सेक्रटरीज का कार्यकाल 3 से 5 साल का होगा. लेकिन कामकाज संतोषजनक रहने वाले कार्यकाल पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है. प्राइवेट नौकरी से सीधे इस पद पर नियुक्त होने वाले लोगों को ज्वॅाइंट सेक्रेटरी वाली सारी सुविधाएं और वेतन मिलेंगे.

क्या होनी चाहिए योग्यता :

न्यूनतम आयु कम से कम 40 होनी चाहिए. हालांकि अधिकतम आयु का कोई जिक्र नहीं है.  उम्मीद्वार के पास कम से कम 15 साल का अनुभव होना चाहिए. कार्यकाल तीन साल का होगा, लेकिन कामकाज संतोषजनक रहने वाले कार्यकाल पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है.  इनका वेतन केंद्र सरकार के अंतर्गत जॉइंट सेक्रटरी वाला होगा. सारी सुविधा उसी अनुरूप ही मिलेगी. इन्हें सर्विस रूल की तरह काम करना होगा और दूसरी सुविधाएं भी उसी अनुरूप मिलेंगी.

10 मंत्रालयों में होगी ‘विशेषज्ञ’ की नियुक्ति 
शुरुआती पहल के अनुसार अभी सरकार 10 मंत्रालयों में एक्सपर्ट जॉइंट सेक्रटरी को नियुक्त करेगी. ये 10 मंत्रालय और विभाग हैं- फाइनैंस सर्विस, इकनॉमिक अफेयर्स, ऐग्रिकल्चर, रोड ट्रांसपोर्ट, शिपिंग, पर्यावरण, रिन्यूअबल एनर्जी, सिविल एविएशन और कॉमर्स. इन मंत्रालयों और विभागों में नियुक्ति कर विशेषज्ञता के हिसाब से ही पोस्टिंग होगी.

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