मोदी की हत्या की साजिश पर सियासत ठीक नहीं

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एमटीटी नेटवर्क। देश में पीएम मोदी की हत्या की साजिश को लेकर सियासत तेज हो गयी है. सरकार और विपक्ष दोनों ही इस मुद्दें पर सियासत कर रही है. भाजपा विपक्ष पर निशाना साध रही है वही विपक्ष भाजपा को इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा करने का आरोप लगा रही है. प्रश्न यह है कि क्या पीएम की हत्या की साजिश पर राजनीति होनी चाहिए. क्या इस मुद्दें को दलित राजनीति का रंग देना सही है.

दरअसल इस साजिश का खुलासा तब हुआ जब पुणे पुलिस ने भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक इन पांचों के संबंध प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) गुट से हैं. इनमें से एक आरोपी के घर पर छापेमारी के दौरान पुलिस को वो लेटर मिला, जिससे पूरी साजिश का खुलासा हुआ. दिल्ली से मिले इस लेटर के मुताबिक माओवादी पीएम मोदी को मारने की योजना बना रहे है. पत्र में कहा गया कि मोदी की अगुवाई में हिंदू फासीवादी शासन आदिवासियों को रौंदते हुए तेजी से उनके जीवन में घुसता जा रहा है.

बिहार और पश्चिम बंगाल में मिली बड़ी हार के बावजूद मोदी 15 राज्यों में भाजपा सरकार की स्थापना करने में सफल रहे हैं. पत्र में कहा गया है कि अगर यह रफ्तार जारी रही तो इसका मतलब होगा कि पार्टी के लिए सभी मोर्चे पर काफी परेशानी आने वाली है. इस पत्र के सामने आने के बाद पक्ष विपक्ष में सियासी घमासान मच गया है.

भाजपा नेता अरुण जेटली ने इसे विपक्ष की साजिश करार दिया है. जेटली ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर के विपक्ष पर पलटवार किया है. वही एनसीपी और विपक्ष का कहना है कि सरकार दलितों को फंसा रही है. सरकार जानबूझ कर इसे मुद्दा बना रही है. सरकार ने नक्सलियों से डिल किया हुआ है. उनका आरोप है कि सरकार ने 4 सालों में कुछ किया नहींं है इसलिए अब सरकार बचने के लिए तरह तरह के पैंतरे बदल रही है.

प्रश्न यह है कि क्या पीएम की हत्या की साजिश पर सियासत जरुरी है. क्या पक्ष और विपक्ष की जिम्मेदारी नहीं होती कि वह मिलकर पीएम की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतें. पुलिस का सहयोग करें और किसी भी तरह की अनहोनी से देश को बचाएं.

 

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