आधी रात को कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का मतलब क्या है

एमटीटी नेटवर्क। पिछले कुछ दिनों से एक नयी परंपरा की शुरूआत हो गयी है. यह परंपरा है आधी रात को कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की. वास्तव में अगर किसी देश में कोर्ट का दरवाजा आधी रात को भी खुलने लगे तो यह तो शुभ संकेत है. निश्चित तौर पर यह बेहतर पहल है कि आधी रात को भी न्यायालय के दरवाजे खुले है. पर सच्चाई यह है कि विषय बहुत गंभीर है. कोर्ट के दरवाजे आधी रात खुलते हैं तो उसमें कितना हिस्सा आम आदमी का होता है, इसपर विचार करना भी जरूरी है. देश में ऐसे कई केस पड़े है जिसकी सुनवाई वर्षों नहीं हो पा रही है. क्योंकि देश में वकिलों की संख्या कम है. परंतु जैसे ही यह मामला राजनीति से जुड़ जाता है तो सुनवाई के लिए रात में भी कोर्ट के दरवाजे खुल जाते है. कहीं ऐसा तो नहीं हो रहा कि कार्यपालिका न्यायपालिका पर भारी पड़ रही है. इस पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है.

अभी कर्नाटक चुनाव के परिणाम आये तो किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला. राज्यपाल ने बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा को सरकार बनाने का मौका दे दिया. राज्यपाल के इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौति दी. सुप्रीम कोर्ट पर लगातार दवाब बनाकर आधी रात को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खुला. सुनवाई भी हुई, यह अलग बात है कि कांग्रेस को निराशा हाथ लगी.

देश की आम जनता यह सबकुछ देख रही है और वह सोच रही होगी कि आखिर उनके मामलों की सुनवाई कब होगी. इस देश में ऐसे भी कई मामले है जहां उम्र गुजरने के बाद बरी किया जाता है.कई मामलों में तो मौत के बाद भी सुनवाई पूरी नहीं हो पाती है.आखिर क्यों??

कब कब आधी रात को खुली अदालत…

07 सितंबर, 2015
फांसी के तख्ते पर पहुंचने के कुछ घंटे पहले ही निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली को सुप्रीम कोर्ट से जीवनदान मिला. शीर्ष अदालत ने रात एक बजकर 40 मिनट पर फांसी के फैसले पर अमल एक सप्ताह के टाल दिया. न्यायमूर्ति एचएल दत्तू व न्यायमूर्ति अनिल आर दवे की पीठ ने कोली की याचिका पर विशेष सुनवाई की थी.

02 फरवरी, 2017
छत्तीसगढ़ की एक अदालत में नाबालिग आदिवासी लड़कियों को देह व्यापार के दलदल में धकेलने और दुष्कर्म के मामले की सुनवाई रात भर चली. विशेष अदालत ने सुबह 212 पन्ने का फैसला सुनाया. 7 अभियुक्तों को आजीवन कारावास, एक को 14 साल और एक को 10 साल की सजा सुनाई गई.

05 मई, 2018
बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस एसजे कथावाला ने गर्मी की छुट्टी से पहले लंबित मुकदमे निपटाने के लिए सुबह 3.30 बजे तक लगातार सुनवाई करके इतिहास रचा. पहले भी वह अपने चेंबर में देर रात तक मामलों की सुनवाई कर चुके हैं.

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