कौन थी महारानी अहिल्याबाई ? क्यों मिला देवी का दर्जा ?

महारानी अहिल्याबाई होलकर भारत के मालवा साम्राज्य की महारानी थी.अहिल्याबाई भारतीय इतिहास की एकमात्र ऐसी महारानी थी जिन्हें जीवन काल में ही देवी का दर्जा मिला. अपने जन कल्याण के कार्य और न्यायप्रिय शासन की वजह से वह प्रजा के लिए प्राणों से कहीं अधिक प्यारी थी. अहिल्याबाई का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर के छौंड़ी ग्राम में हुआ. उनके पिता मंकोजी राव शिंदे, अपने गाव के पाटिल थे. हालांकि तब लड़कियां स्कूल नहीं जाती थी लेकिन अहिल्याबाई के पिता ने इन्हें पुत्र की तरह पाला और शिक्षित भी किया. 12 साल की आयु में इनका विवाह इन्दौर राज्य के संस्थापक महाराज मल्हार राव होल्कर के पुत्र खंडेराव से हुआ था. सन् 1745 में अहिल्याबाई के पुत्र हुआ और तीन वर्ष बाद एक कन्या. पुत्र का नाम मालेराव और कन्या का नाम मुक्ताबाई रखा. महारानी अपने आदर्श और कुशलता के कारण सबकी प्रिय हो गयी थी.राज काज के कामों में महाराजा व अपने पति का हांथ बटांती थी.लेकिन कुछ ही वर्षों बाद महारानी अहिल्याबाई के पति का निधन हो गया.पति के निधन के बाद वह सती बनने जा रही थी.लेकिन महाराज ने उन्हें रोक लिया और राज काज संभालने की बात कही. महारानी ने कहा कि अगर वह सती नहीं हुई तो लोग उनकी बदनामी करेंगे, तरह तरह के आरोप लगाएंगे. तब महाराज ने उन्हें समझाया कि अगर सती न बनकर जग कल्याण और पूण्य का कार्य करता है तो वह सभी तरह के पापों से मुक्त होगा. इसके बाद महारानी ने सती न बनकर सामाज कल्याण का निश्चय कर लिया.पति की मृत्यु के कुछ ही दिनों बाद महाराज मल्हार राव की भी मृत्यु हो गयी. जिसके बाद महारानी ने साम्राज्य संभाला और प्रजा के कल्याण के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन अर्पित कर दिया.

महेश्वर की खूबसूरती का दीदार करने के लिए यहां क्लीक करें 
कुछ समय बाद महारानी अहिल्याबाई अपनी राजधानी महेश्वर ले गईं. वहां नर्मदा नदी के तट पर उन्होंने 18वीं सदी का बेहतरीन और आलीशान अहिल्या महल बनवाया. अपने शासन काल में महारानी अहिल्याबाई ने सामाज कल्याण के लिए अनेक कार्य किए.उन्होंने नदियों को संरक्षित किया.कुंएं खुदवाए, वृक्ष लगवाएं तथा धर्म की धूरी को बचाने के लिए सम्पूर्ण भारत में श्रेष्ठतम मंदिरों का निर्माण कराया.

You may also like...

MY TIMES TODAY
Right Menu Icon